बलरामपुर। जिलाधिकारी और अधिवक्ताओं के बीच विवाद सुलझाने के लिए सोमवार को हुई वार्ता में समझौते की बात नहीं बन पाई। अब अधिवक्ताओं की मांगों पर विचार करने के लिए जिलाधिकारी की ओर से कमेटी गठित करने की तैयारी है। वहीं अधिवक्ताओं की मंगलवार को बैठक होगी जिसमें आगे की रणनीति तय होगी। हालांकि, वार्ता के बाद भी अधिवक्ताओं का आंदोलन जारी है। मंगलवार को भी अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से विरत रहेंगे।
दोपहर एक बजे बार संघ भवन में संयुक्त बार संघ की बैठक बुलाई गई है। इसमें सभी बार संघों के पदाधिकारी और अधिवक्ता शामिल होकर आंदोलन की अगली रणनीति तय करेंगे। बैठक में कमेटी के गठन, अधिवक्ताओं की मांगों और उनके समाधान के लिए की जाने वाली पहल पर चर्चा होगी। बैठक के बाद ही आंदोलन को लेकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के महामंत्री कमलेश्वर सिंह ने बताया कि अधिवक्ताओं की मांगों पर विचार करने के लिए डीएम की ओर से कमेटी गठित करने का आश्वासन दिया गया है। सोमवार को जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन के साथ हुई वार्ता के बाद 27 अक्तूबर को सभी बार संघों के पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं की बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया है। इसमें मांगों पर विचार-विमर्श कर आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।
वार्ता के दौरान जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मुर्तजा हुसैन खान, कमलेश्वर सिंह, मृगेंद्र उपाध्याय, प्रहलाद यादव, कमल नयन तिवारी, संजय तिवारी, राजेश कुमार मिश्र, अशोक कुमार मिश्रा, श्याम सुंदर मिश्रा, रवि शंकर मिश्रा, रवीन्द्र कुमार मिश्रा, गयास अहमद खां, अजय बहादुर सिंह, अखिलेश सिंह और रुद्रेश विक्रम सिंह शामिल रहे।
15 अक्तूबर से चल रहा आंदोलन, दो मांगों को लेकर बढ़ा विवाद
अधिवक्ताओं का आंदोलन 15 अक्तूबर से चल रहा है। नामांतरण और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया ऑनलाइन किए जाने तथा वीर विनय चौक स्थित अधिवक्ता संघ भवन को गिराने के लिए जारी नोटिस को लेकर विवाद बढ़ा था। अधिवक्ता ऑनलाइन व्यवस्था के तहत लेखपाल से रिपोर्ट मांगने की प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं।
अधिवक्ताओं का कहना है कि दाखिल-खारिज एक न्यायिक प्रक्रिया है। इसमें दोनों पक्षों को सुनने और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने के बाद मामले के गुण-दोष के आधार पर निर्णय होना चाहिए। उनका तर्क है कि सीधे लेखपाल से रिपोर्ट मांगने की व्यवस्था से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा, मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल से जिलाधिकारी की मुलाकात नहीं होने का मामला भी आंदोलन की वजह बना।
दीवानी न्यायालयों में नहीं हो सकी सुनवाई
अधिवक्ताओं के कार्य बहिष्कार का असर न्यायालय पहुंचने वाले वादकारियों पर भी पड़ रहा है। शनिवार को दीवानी न्यायालय पहुंचे दूरदराज के गांवों के लोगों को मुकदमों की सुनवाई नहीं होने के कारण बिना पैरवी के लौटना पड़ा। कई वादकारियों को अगली तारीख पर दोबारा न्यायालय आने की चिंता सताती रही। अधिवक्ताओं की हड़ताल लंबी खिंचने से मुकदमों की सुनवाई प्रभावित हो रही है।
हरैया सतघरवा के विक्की शुक्ला ने बताया कि वह मुकदमे की सुनवाई के लिए न्यायालय पहुंचे थे, लेकिन कामकाज ठप होने से उनका इंतजार बेकार गया। पिंटू श्रीवास्तव ने कहा कि जरूरी काम छोड़कर मुकदमे की पैरवी के लिए आए थे, लेकिन सुनवाई नहीं होने से निराश होकर लौटना पड़ा। संजय ने बताया कि न्यायालय आने में पूरा दिन निकल गया, फिर भी काम नहीं हुआ। अब अगली तारीख पर दोबारा आना पड़ेगा।