बलरामपुर। संयुक्त जिला चिकित्सालय में एक महीने से मरीजों से जुड़ी सर्जरी का काम ठप है। अस्पताल में सर्जन की तैनाती न होने के कारण प्रतिदिन ऑपरेशन के लिए पहुंचने वाले जरूरतमंद मरीजों को हताश-निराश होकर लौटना पड़ रहा है। दो विभागों के बीच चल रही रस्साकसी के कारण संयुक्त जिला चिकित्सालय में स्थानीय सर्जन भी संबद्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मरीज व तीमारदार दोनों परेशान हैं।
संयुक्त जिला चिकित्सालय में तैनात रहे पूर्व सर्जन डॉ. आरडी रमन का जून माह में गैर जनपद स्थानांतरण हो गया था। इसके बाद से अस्पताल में किसी भी सर्जन की तैनाती न होने से मरीजों के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। पहले जिला अस्पताल होने के कारण चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के तहत स्वास्थ्य व्यवस्था देखा जाता है। अब संयुक्त जिला चिकित्सालय को पंडित अटल बिहारी वाजपेयी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। ऐसे में अब इस अस्पताल का संचालन चिकित्सा शिक्षा विभाग के नियमों के तहत हो रहा है।
अन्य जिला अस्पताल व ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के सर्जन तैनात हैं। संयुक्त जिला चिकित्सालय चिकित्सा शिक्षा के अधीन होने के कारण दूसरे चिकित्सक (सर्जन) को यहां संबद्ध नहीं किया जा रहा है। ऐसे में एक महीने से अस्पताल में ऑपरेशन ठप है। संयुक्त जिला चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजकुमार वर्मा ने बताया कि सर्जन सहित अन्य चिकित्सकों की तैनाती के लिए पत्र लिखा गया है। शीघ्र ही चिकित्सक मिलने की उम्मीद है।
निजी अस्पताल में कराना पड़ रहा महंगा इलाज
संयुक्त जिला चिकित्सालय में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मेधावी सिंह ने ही सिर्फ प्रसव से जुड़े सिजेरियन कर रही हैं। सामान्य सर्जन न होने के कारण अन्य मरीज सर्जरी न होने से परेशान हैं। रामसागर ने बताया कि उनकी बेटी के पित्त की थैली में पथरी की समस्या है, अल्ट्रासाउंड जांच रिपोर्ट के बाद ऑपरेशन कराना था। सर्जन न होने के कारण 12 दिनों से ऑपरेशन टल रहा है। मजबूरी में अब बाहर निजी अस्पताल में ऑपरेशन करा जेब ढीली करना पड़ेगी।
जिलाधिकारी से करेंगे वार्ता
जब तक स्थायी सर्जन की तैनाती नहीं होती है, तब तक जिले में तैनात किसी सर्जन को अस्पताल से संबद्ध कराने के लिए
जिलाधिकारी से वार्ता की जाएगी। एक-दो दिन में चिकित्सक के संबद्ध हो जाने से ऑपरेशन फिर शुरू हो जाएंगे।
प्रो. राजेश कुमार चतुर्वेदी, नोडल प्रधानाचार्य मेडिकल कॉलेज