बलरामपुर। जिले में बाढ़ के दौरान किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष तैयारी शुरू कर दी है। बाढ़ प्रभावित ग्राम पंचायतों में गर्भवती महिलाओं, तीन वर्ष तक के बच्चों और 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों की पहचान कर उनकी सूची तैयार की जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल स्वास्थ्य सेवाएं और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशा कार्यकर्ता, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से बलरामपुर और उतरौला तहसील क्षेत्र के संभावित बाढ़ प्रभावित गांवों में सर्वे कराया जाएगा। इस दौरान सितंबर तक प्रसव संभावित गर्भवती महिलाओं, तीन वर्ष तक के बच्चों तथा 70 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों का विस्तृत डेटा एकत्र किया जाएगा।
यह सूची संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों और प्रशासनिक अधिकारियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके आधार पर गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था, आवश्यकता पड़ने पर एंबुलेंस सेवा, बच्चों के टीकाकरण, दवाओं की उपलब्धता और बुजुर्गों के उपचार की विशेष योजना बनाई जाएगी।
इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमों की तैनाती, आवश्यक दवाओं का भंडारण और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को भी मजबूत किया जाएगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने बताया कि यह पूर्व-तैयार सूची राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक प्रभावी बनाएगी और सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाना आसान होगा।
बाढ़ से अधिक प्रभावित 137 गांव
बलरामपुर और उतरौला तहसील क्षेत्र के कुल 137 गांव राप्ती नदी की बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित रहते हैं। इनमें बलरामपुर के 82 और उतरौला के 55 गांव शामिल हैं।
बलरामपुर तहसील के प्रभावित गांवों में घुघुलपुर, रछौड़ा, कल्याणपुर, टेंगनहिया मानकोट, चौका खुर्द, गंगापुर बांकी, अड़ारपाकड़, रघवापुर, सेमरहना, जबदही, झौहना, कलंदरपुर, पयागपुर, ज्योनार, ढोंढरी, बेलवा सुल्तानजोत, बरांव, मन्नीपुर टिकुइयां, कटरा शंकरनगर, सोनार, हरवंशपुर, कोलवा, राजघाट, भगवतपुर, फत्तेजोत, रामपुर बनघुसरा, मधवाजोत, भगवानपुर, लालाजोत, मिर्जापुर, रोवारी, सिसई, मदारा और डकही सहित कुल 82 गांव शामिल हैं।
इसी तरह उतरौला तहसील क्षेत्र के मस्तीजोत, टेढ़वा चुहचुहिया, लखमा, चंदापुर, चिताही, मझारी चूल्हा, नंदमहरा, बायभीट, बाघाजोत, लारम, केरावगढ़, फत्तेपुर, केवटली, रुस्तमनगर, मोहनजोत, लालनगर, महुवाधनी और सुरहियादेवर सहित 55 गांव अति बाढ़ प्रभावित सूची में हैं।
17 वर्षों में 16 बार बाढ़ की स्थिति
राहत आयुक्त कार्यालय के अनुसार, पिछले 17 वर्षों में जिले में 16 बार बाढ़ की स्थिति बन चुकी है। फ्लड फ्रीक्वेंसी विश्लेषण के अनुसार राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से उतरौला और बलरामपुर तहसील क्षेत्र के ये 137 गांव सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं।
राहत आयुक्त कार्यालय ने इन गांवों में बाढ़ से बचाव के लिए इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम के गठन के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के विशेष प्रबंध सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।