बलरामपुर। तराई क्षेत्र का सोहेलवा स्थित जलाशय वुडसैंड पाइपर, साइबेरियन क्रेन, ब्लैक विंग स्टिल्ट कामनटील, स्पाटेड रेड शैक जैसे विदेशी पक्षियों के कलरव से गूंज रहा है। भोजन व पानी से समृद्ध सोहेलवा के जलाशयों में प्रति वर्ष रूस, साइबेरिया, चीन तथा श्रीलंका से बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी प्रवास के लिए आते हैं। करीब चार माह के प्रवास के बाद यह परिंदे स्वदेश वापसी करते हैं। इस दौरान इनके दीदार को पर्यटकों की जुटने वाली भीड़ से पूरे सोहेलवा क्षेत्र में चहल-पहल कायम रहती है। वन विभाग इन परिंदों की निगरानी वाच टावर तथा नियमित पेट्रोलिंग से कर रही है।
सर्दियों के मौसम में तराई क्षेत्र के सोहेलवा सेंक्चुरी स्थित भगवानपुर जलाशय, चित्तौड़गढ़, करहिया, रजिया ताल, चांदे ताल सहित कई ग्रामीण तालाबों में भी देशी तथा विदेशी परिंदों का सर्दियों में हर साल आगमन होता है। सोलेहवा सेंक्चुरी जैव विविधताओं के साथ-साथ वन्य जीवों व परिंदों की विभिन्न प्रजातियों के लिए मशहूर है।
डीएफओ डॉ. एम सेम्मारन ने बताया कि खैरमान तथा रजिया ताल को विदेशी मेहमान परिंदों के लिए संरक्षित कर इको टूरिज्म को बढ़ावा देने का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए करीब 194 हेक्टेयर क्षेत्र में विदेशी परिंदों के लिए सभी तरह की आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए ईको टूरिज्म डेवलपमेंट का विस्तृत प्लान मंजूरी के लिए प्रदेश सरकार को भेजा गया है।