पुलिस अधीक्षक कार्यालय में एएसपी विशाल पांडेय से वार्ता करते व्यापारी। स्रोत व्यापारी संघ
बलरामपुर। भारत-नेपाल सीमा पर संवेदनशीलता को देखते हुए जिले में बुधवार देरशाम 220 वीं सेक्टर स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में नेपाल-चीन गतिविधियों पर विशेष सतर्कता बरतने, सीमावर्ती गांवों में निगरानी बढ़ाने और सीमा सुरक्षा को और मजबूत बनाने पर ठोस रणनीति तैयार की गई।
9वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल बलरामपुर परिसर में हुई बैठक की अध्यक्षता आयुक्त देवीपाटन शशि भूषण लाल सुशील और उप महानिरीक्षक मुन्ना सिंह (एसएसबी) ने की। इसमें पुलिस, कस्टम, डीआरआई, एनसीबी सहित तमाम सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
बैठक में सबसे पहले पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों की समीक्षा और उन पर हुई प्रगति का आकलन किया गया। इसके बाद नेपाल की राजनीतिक स्थिति और चल रहीं गतिविधियों पर मंथन हुआ।
बैठक में खासतौर से बलरामपुर और गोंडा जनपद के उन गांवों का जिक्र किया गया जो सीधे सीमा से सटे हैं। इन गांवों में कई बार तस्करी, अवैध पारगमन और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलती रही है। बैठक में तय हुआ कि एसएसबी और स्थानीय पुलिस संयुक्त गश्त को और तेज करेगी। गांव स्तर पर चौकसी समितियां बनाकर ग्रामीणों को सतर्क किया जाएगा। ड्रोन और आधुनिक तकनीक से निगरानी तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।
मानव तस्करी और कट्टरपंथी गतिविधियों पर रहेगी नजर
मानव तस्करी के हाल के मामलों को गंभीरता से लेते हुए एजेंसियों ने संयुक्त कार्ययोजना बनाई। पुलिस, एसएसबी, कस्टम, एनसीबी और डीआरआई द्वारा पकड़े गए मामलों से प्राप्त सुराग साझा किए गए। वहीं कट्टरपंथी गतिविधियों पर भी खुफिया एजेंसियों ने अलर्ट किया। स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की उग्र गतिविधि को जड़ से खत्म करने के लिए कड़ी व समयबद्ध कार्रवाई होगी। बैठक में यह तय किया गया कि हर एजेंसी को ठोस जिम्मेदारी दी जाएगी और कार्रवाई समयबद्ध व प्रभावी होगी। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि इस समन्वय बैठक के बाद सीमा पार अपराधों पर नकेल कसी जाएगी।