बलरामपुर। उदासीन संगत गेल्हापुर मंदिर में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण (भ्रमणशील मंडल) में शामिल संत-महंतों ने धर्म की व्याख्या करते हुए ईश्वर एवं गुरु की महिमा का बखान किया। भक्तों को धर्म एवं कर्म के बारे में जानकारी देते हुए समाज व राष्ट्र की उन्नति के लिए सत्कर्म करने का संदेश दिया गया।
सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए श्री महंत महेश्वरदास महराज ने कहा कि केवल पूजा-पाठ करना ही संतों का काम नहीं है। संत वही है, जो भक्तों को सही राह दिखाए। खुद धर्म का पालन करने के साथ ही अपने भक्तों को भी धर्म के अनुुसार सत्कर्म करने की प्रेरणा देना ही संतों का प्रमुख कर्तव्य है। समाज को सही दिशा दिखाकर तथा भक्तों को अच्छाई व बुराई का ज्ञान कराकर संत समाज, राष्ट्र की उन्नति में योगदान कर सकते हैं। महंत दुर्गादास महराज व महंत अद्वेतानंद महराज ने कहा कि संत समाज हमेशा समाज को सही दिशा दिखाता है। देश व समाज में बढ़ रही नशाखोरी, दुर्व्यसन, अपराध एवं अधर्म की रोकथाम के लिए संत समाज को आगे आने की आवश्यकता है। हमें पूजा-पाठ के साथ ही इस दिशा में भी कार्य करना चाहिए।
उदासीन संगत गेल्हापुर के महंत बृजानंद महराज ने श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन निर्वाण (भ्रमणशील मंडल) में शामिल संत-महंतों का स्वागत करते हुए भक्तों को नशाखोरी व दुर्व्यसन से दूर रहने का संकल्प दिलाया। इसके बाद अरदास के साथ ही प्रसाद का वितरण भी किया गया। इस अवसर पर कोठारी शंकरदास, अनुज मुनि, दान मुनि, पुजारी देव मुनि, राम मुनि, प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष शांति भूषण शुक्ल, महामंत्री शशिकांत त्रिपाठी, दिनेश तिवारी, रानू सिंह, राजू सिंह व पिंटू तिवारी आदि मौजूद रहे।