बलरामपुर के नई बाजार में कथा व्यास की पूजा अर्चना करते लोग।
तुलसीपुर (बलरामपुर)। साईं इतना दीजिए, जामे कुटुंब समाय, मैं भी भूखा ना रहूं साधु न भूखा जाए...भजन के साथ बुधवार को श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ किया गया। नई बाजार में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास दद्दन महाराज ने सदकर्म व धर्मपूर्ण आचरण का महत्व समझाते हुए कथा की शुरुआत की।
उन्होंने कहा कि एक बार शमीक ऋषि समाधि में लीन होकर भगवान की भक्ति कर रहे थे। इसी दौरान राजा परीक्षित ने उन्हें कई बार आवाज दी लेकिन उनका ध्यान भंग नहीं हुआ। इसके बाद राजा परीक्षित ने नाराज होकर उनके गले में सर्प की माला डाल दी, जिसकी जानकारी होने पर शमीक ऋषि के बेटे श्रृंगी ऋषि ने क्रोध में राजा परीक्षित को श्राप देते हुए कहा कि यही सांप एक सप्ताह के बाद तुम्हें डस लेगा। राजा परीक्षित को जब अपनी गलती का अहसास हुआ, तब उन्होंने ऋषियों से पूछा कि अब वे क्या करें। इसके बाद ऋषियों ने उन्हें श्रीमद्भागवत कथा सुनने के लिए कहा। उन्होंने जब श्रीमद्भागवत कथा सुनी तो उनका कल्याण हुआ।
इसके पूर्व आयोजक अनिल कुमार श्रीवास्तव, मनोज कुमार श्रीवास्तव, संजय श्रीवास्तव व छोटू आदि ने व्यास गद्दी की पूजा-अर्चना की। कथा की समाप्ति के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।