ललिया। क्षेत्र के माधवापुर चौककला व गंगा बख्श भागड़ गांव में कटान तेज हो गई है। करीब 250 बीघा कृषि योग्य भूमि और कई घर राप्ती नदी की भेंट चढ़ चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव का कंपोजिट विद्यालय, पंचायत भवन और दर्जनों घरों पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। नदी लगातार गांव की ओर बढ़ रही है।
गांव के सियाराम ने बताया कि उनकी 20 बीघा जमीन और घर नदी में समाहित हो चुका है। वर्षों की मेहनत पानी में बह गई। राम पदारथ के 16 बीघा खेत और त्रिभुवन की 10-15 बीघा जमीन भी कटान की चपेट में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए केवल नाव ही उनका सहारा है। बाजार जाना, बच्चों को स्कूल पहुंचाना और मेडिकल जैसी आवश्यकताएं, अब नाव के जरिये ही संभव हैं। कटान की वजह से नाव से यात्रा भी जोखिमपूर्ण हो गई है। कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। वहीं, बाढ़ कार्य खंड कार्य विभाग के अधिकारियों को डीएम पवन अग्रवाल ने कटान वाले गांवों में कटानरोधी कार्य कराने के निर्देश दिए हैं।
रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल
माधवापुर के विनय राम, विजय, छोटकू और सीताराम रामदीन ने बताया कि खेत और घर नदी में समाने के बाद से उनका जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, रोजगार और परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल है। विनय राम ने कहा कि अब हमारे लिए सिर्फ बचाव ही प्राथमिकता है। हम अपने परिवार को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे हैं।
चेतावनी बिंदु के नीचे पहुंची राप्ती
राप्ती नदी चेतावनी बिंदु से 60 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गई है। शनिवार को नदी चेतावनी बिंदु पार कर 10 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी, जिससे बाढ़ का संकट गहरा गया था। नदी का चेतावनी बिंदु 103.620 है, रविवार शाम को नदी का जलस्तर 103.020 मीटर दर्ज किया गया। 24 घंटे में नदी का जलस्तर करीब 70 सेंटीमीटर घटा है। आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर कम हो रहा है, इससे फिलहाल बाढ़ का संकट टल गया है। वहीं, बाढ़ कार्य खंड के अधिशाषी अभियंता भरत राम ने बताया कि जिन स्थानों पर कटान हो रही है, वहां पर कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं।