महराजगंज तराई। खेतों की उपजाऊ मिट्टी को लीलने के बाद अब राप्ती नदी का विकराल रूप सीधे इंसानी बस्तियों की ओर बढ़ चला है। नदी और गांवों के बीच की दूरी सिमटकर सिर्फ 50 मीटर रह गई है, जिससे बेला, हरबसपुर और कोडरी गांवों के करीब 200 परिवारों पर सिर से छत छिन जाने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन की खामोशी और हर दिन तेजी से कटती जमीन के बीच, सहमे हुए ग्रामीण दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं।
बेला के मजरे हरिवंशपुरवा और कोडरी के समीप राप्ती नदी का आक्रामक रुख थमने का नाम नहीं ले रहा है। नदी की बदलती धारा अब सीधे रिहायशी इलाकों की तरफ बढ़ रही है, जिससे ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ गई है। दिन-रात घरों की सुरक्षा को लेकर आशंकित ग्रामीण किसी अनहोनी के डर से सहमे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नदी केवल खेतों को काट रही थी, तब तक नुकसान बड़ा होने के बावजूद स्थिति को संभालने की एक उम्मीद ब बची थी। अब खतरा सीधे आबादी पर आन पड़ा है। यदि समय रहते मजबूत कटानरोधी इंतजाम नहीं किए गए, तो एक बड़ी आबादी के सामने गंभीर विस्थापन का संकट खड़ा हो जाएगा।
किसानों की वर्षों की मेहनत पर फिरा पानी
राप्ती के विकराल रूप ने किसानों की बरसों की पूंजी और मेहनत को चंद पलों में लील लिया है। नदी के कटान से बड़े पैमाने पर कृषि भूमि बह चुकी है। लगातार जमीन के नदी में विलीन होने से किसानों के पास खेती का रकबा लगातार सिमटता जा रहा है। उपजाऊ जमीन के खत्म होने से अब इन परिवारों के सामने आजीविका का भारी संकट पैदा हो गया है।
इन किसानों की उपजाऊ भूमि डूब चुकी
वलीदीन (3 बीघा), शाहआलम (3 बीघा), मोहर (2 बीघा), पन्नालाल (3 बीघा), मेला राम (2 बीघा), कल्लू (3 बीघा), रामदयाल (2 बीघा) और बड़कऊ (3 बीघा) आदि किसानों की उपजाऊ भूमि डूब चुकी है। इसके अलावा रामदयाल की 18 बीघा, अवध राम की 22 बीघा, बराती सैनी की 9 बीघा, मोबीन की 5 बीघा, रईस की 2 बीघा, मेलाराम की 3 बीघा और दयाराम की 3 बीघा कृषि भूमि भी नदी की भेंट चढ़ चुकी है।
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प्रशासन का दावा, बाढ़ खतरा नहीं, निगरानी बढ़ाई गई
राप्ती नदी का जलस्तर सोमवार सुबह आठ बजे 102.750 मीटर दर्ज किया गया। नदी का चेतावनी बिंदु 103.620 मीटर है। यानी जलस्तर चेतावनी बिंदु से महज 87 सेंटीमीटर नीचे है। प्रशासन के अनुसार तटवर्ती गांवों में फिलहाल कटान या जलभराव की समस्या नहीं है। कोडारी घाट पर पूर्व में कटान को देखते हुए बांस, नायलॉन क्रेट, गेबियन आदि से कटानरोधी कार्य कराए गए हैं। बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए 32 बाढ़ चौकियां, 19 शरणालय और 32 मेडिकल टीमें तैयार रखी गई हैं। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन का कहना है कि फिलहाल जिले में बाढ़ की स्थिति नहीं है, लेकिन तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी रखी जा रही है।
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हरबसपुर और कोडरी में भी संकट की दस्तक
हरबसपुर के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ समय से नदी लगातार जमीन काट रही है। कटान की वजह से कई किसानों का खेती योग्य रकबा कम हो गया है। अब नदी की दूरी घरों से लगातार घट रही है। बेला के ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि नदी और आबादी के बीच अब महज 50 मीटर का फासला बचा है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि उमेश यादव, राजेश कुमार, अजय कुमार पांडेय, कृष्ण मोहन, राममूरत, रामनरेश, उदयभान, नीरज, त्रिभुवन, जगतराम और शारदा प्रसाद समेत ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कटानरोधी कार्य कराने की मांग की है।
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स्थिति पर रखी जा रही है नजर
जिले में फिलहाल बाढ़ की कोई स्थिति नहीं है। राप्ती नदी के कटान पर नजर रखी जा रही है। विभाग को कटान रोकने के लिए हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं।
हेमंत गुप्ता, एसडीएम उतरौला
बलरामपुर के हरबसपुर और कोडरी के पास कटान कर रही राप्ती नदी
बलरामपुर के हरबसपुर और कोडरी के पास कटान कर रही राप्ती नदी
बलरामपुर के हरबसपुर और कोडरी के पास कटान कर रही राप्ती नदी