बलरामपुर। सात दिन बीतने के बाद भी राप्ती खतरे के निशान से करीब 70 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। नदी खतरे के निशान 104.620 मीटर के सापेक्ष शुक्रवार शाम पांच बजे 105.320 मीटर पर स्थिर थी। जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है। वहीं, बाढ़ के चलते शहर के साथ ही उतरौला के कई मोहल्लों में पानी भरा है। अभी भी 300 गांव बाढ़ से प्रभावित हैैं। इनमें से करीब 100 गांव टापू बने हुए हैं। जबकि 300 गांवों की बिजली आठवें दिन भी गुल रही।
बताते चलें कि बलरामपुर शहर में चार दिन पहले आई बाढ़ का पानी अभी भी गोविंदबाग, गदुरहवा, निबकौनी, बलुहा, दिपवाबाग, बलुहा आदि मोहल्लों के आसपास भरा है। शहर के लोगों को ट्रैक्टर-ट्रॉली से पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है। कई मोहल्लों में नाव लगाई गई है। बाढ़ का पानी निकालने के लिए नगर पालिका प्रशासन ने दो पंपिंग सेट लगाए हैं। बाढ़ का पानी भरा होने से इन मोहल्लों में गंदगी से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है।
धूप निकलने से संक्रामक रोग फैलने की आशंका भी है। उतरौला नगर के भी कई मोहल्लों में पानी भरा है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा फ्लड पीएसी की करीब 32 टीमें राहत व बचाव कार्य में जुटी हैं। एडीएम/आपदा अधिकारी राम अभिलाष ने बताया कि राहत व बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। बाढ़ पीड़ितों को हर संभव सहायता पहुंचाई जा रही है। नदी का जलस्तर कम होने के साथ-साथ बाढ़ पीड़ितों की दुश्वारियां भी कम हो रहीं हैं।