बलरामपुर। बारिश थमने के बावजूद राप्ती का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार शाम नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104.620 मीटर से 24 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचकर 104.860 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर बढ़ने का असर तटवर्ती गांवों के साथ सड़कों और खेतों पर भी दिखाई देने लगा है। कई संपर्क मार्गों पर दो से तीन फीट तक पानी बह रहा है। कुछ स्थानों पर पहाड़ी नालों के तेज बहाव में सड़कें कट गई हैं। कई गांवों का सड़क संपर्क टूटने के बाद ग्रामीण नाव के सहारे आवागमन कर रहे हैं। प्रशासन ने सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर निगरानी बढ़ा दी है।
नेपाल और मैदानी क्षेत्रों में हुई बारिश के बाद राप्ती का जलस्तर लगातार बढ़ता गया। इस साल पहली बार नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंची है। जलस्तर बढ़ने से सदर तहसील क्षेत्र के टेढ़वा, लालपुर, फगुइया, लौकहवा, बनघुसरी समेत करीब 15 गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। गौरा चौराहा-तुलसीपुर, हरिहरगंज-ललिया और कोड़री-मथुरा बाजार मार्ग पर पानी पहुंचने से आवागमन प्रभावित हुआ है।
उतरौला क्षेत्र में नन्दौरी, मझारी टप्पा बांक, नगवा, सोनहत, भरवलिया और छीतजोत समेत करीब एक दर्जन गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। गांवों को जोड़ने वाले रास्तों पर पानी भरने से सड़क संपर्क बाधित हो गया है। ग्रामीणों को जरूरी काम के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। खेतों में पानी भरने से धान की खड़ी फसल डूबने लगी है। ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए तहसील प्रशासन ने नाव उपलब्ध कराई है।
विद्यालय और पंचायत भवन में घुसा पानी, 35 गांवों का संपर्क प्रभावित
तुलसीपुर क्षेत्र में राप्ती का पानी बरगदही, चिकनौटा, चंदनजोत, किठूरा, साखीरेत, हिम्मतपुरवा, सुखदेवपुरवा, तिवारीडीह, पंडितपुरवा और पठानपुरवा समेत कई गांवों के आसपास पहुंच गया है। बरगदही में विद्यालय परिसर और पंचायत भवन में करीब तीन फीट पानी भर गया। इसके कारण विद्यालय बंद करना पड़ा।
ग्रामीण दारा सिंह, बुद्धसेन यादव, राघवेंद्र और कृपाराम ने बताया कि राप्ती की बाढ़ हर साल गांवों के लिए परेशानी लेकर आती है। प्रशासक प्रतिनिधि मंगलदेव सिंह ने बताया कि विद्यालय और पंचायत भवन में पानी भरने के बाद अब धीरे-धीरे गांव की ओर भी पानी पहुंच रहा है। एसडीएम हेमंत गुप्ता ने बताया कि क्षेत्रीय लेखपाल को भेजकर गांवों के आसपास की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
पचपेड़वा क्षेत्र में एसडीएम तुलसीपुर ने मल्दा, कटैया भारी, गौराभारी और भगवानपुर खादर समेत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। मल्दा में बाढ़ राहत केंद्र बनाया गया है। ग्रामीणों मंटू श्रीवास्तव, मिंटू तिवारी, राम अवतार, राकेश कुमार और रोहित कुमार ने बताया कि भगवानपुर खादर के पास बूढ़ी राप्ती और बगहा नाले में उफान आने पर हर साल करीब 35 गांवों का संपर्क प्रभावित हो जाता है।
पहाड़ी नालों ने काट दी सड़क, रास्तों पर बह रहा पानी
ललिया क्षेत्र में राप्ती के साथ पहाड़ी नालों का उफान भी परेशानी बढ़ा रहा है। चनियाकोट से इटहिया बनघुसरी होते हुए रतोही जाने वाला पीडब्ल्यूडी मार्ग पहाड़ी नाले के तेज बहाव में कट गया है। इससे चौपहिया वाहनों का आवागमन बाधित हो गया है। अकबरपुर कला, कुदरगोढ़वा, चनियाकोट और इटहिया बनघुसरी समेत दर्जनों गांवों के लोगों की आवाजाही इसी मार्ग से होती है।
मथुरा-चौधरीडीह मार्ग पर दरगाह के पास धोबहा नाले का पानी सड़क पर बह रहा है। निर्माणाधीन पुल के पास दो से तीन फुट पानी जमा होने से चौपहिया वाहन नहीं निकल पा रहे हैं। हरिहरगंज-बरदोलिया मार्ग के लौकहवा डिप पर भी दो से तीन फुट पानी तेज बहाव के साथ सड़क के ऊपर से गुजर रहा है।
कटान से खेत और फूस के मकानों पर खतरा
चौक कला में राप्ती नदी खेतों का कटान कर रही है। मधवापुर के पास नदी किनारे बने बांध के पास मंगलवार को कटान तेज हुआ। ग्रामीणों के अनुसार अप्रैल में बांध बनाया गया था, लेकिन नदी के लगातार कटाव से अब बांध की सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा हो गया है। राजेश्वरी और केदारनाथ वर्मा के फूस के मकान कटान की जद में हैं। लालू, निवर, राजेश कुमार, राम कुमार और प्रदीप कुमार के खेत और फूस के मकान भी नदी के कटाव से प्रभावित हुए हैं। प्रशासक राजेंद्र प्रसाद वर्मा ने लेखपाल अंबिकेश्वर प्रजापति को सूचना दी है। एसडीएम मनोज कुमार सरोज ने बताया कि कटान की स्थिति की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।
आंधी में केले की फसल बर्बाद, स्कूल की बाउंड्री टूटी
सादुल्लाहनगर क्षेत्र में तेज आंधी और बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। कम्मरपुर निवासी सगीर अहमद ने करीब पांच एकड़ में केले की खेती की थी। फसल तैयार होने की ओर थी, लेकिन तेज हवाओं से बड़ी संख्या में केले के पेड़ जड़ समेत गिर गए। कई पेड़ टूटकर क्षतिग्रस्त हो गए। किसान के अनुसार खाद, सिंचाई और मजदूरी पर काफी खर्च हो चुका था। फसल तैयार होने से पहले नुकसान होने के कारण लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है। हरैया सतघरवा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय खैरहवा में तेज हवा के दौरान पेड़ गिरने से चहारदीवारी टूट गई। इससे विद्यालय परिसर में जानवरों के प्रवेश का खतरा बना हुआ है।
तेज बहाव में बीच धार फंसी बस, रस्सी के सहारे यात्रियों को निकाला
पहाड़ी क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद सीरिया, नकटी और खरझार नाले उफान पर हैं। नालों का पानी बढ़ने से गौरा चौराहा और आसपास के गांवों में बाढ़ के हालात बन गए हैं। गौरा-तुलसीपुर राजमार्ग के दंतरंगवा डिप पर करीब एक मीटर पानी तेज बहाव के साथ सड़क के ऊपर से गुजर रहा है।
मंगलवार को अयोध्या से आ रही बस पानी के तेज बहाव में फंस गई। बस का इंजन अचानक बंद होने से वह बीच धार में रुक गई और यात्रियों में अफरातफरी मच गई। खतरा बढ़ता देख स्थानीय ग्रामीणों ने रस्सी के सहारे एक-एक कर यात्रियों को बस से बाहर निकाला। समय रहते ग्रामीणों की मदद मिलने से बड़ा हादसा टल गया।
बस के बीच धार में फंसने के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बिना देर किए बचाव शुरू किया। रस्सी के सहारे यात्रियों को सुरक्षित किनारे तक पहुंचाया गया। सभी यात्रियों के सुरक्षित निकलने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
चौकिया चौराहा से कोल्हुइया भोजपुर जाने वाले करीब चार किलोमीटर लंबे मार्ग पर भी कई स्थानों पर पानी तेज बहाव के साथ सड़क के ऊपर से गुजर रहा है। इससे इस मार्ग पर भी आवागमन प्रभावित है। स्थानीय लोगों गौरव श्रीवास्तव, आकाश तिवारी, रामउग्गर यादव और दुष्यंत चौधरी ने बताया कि पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है और डिप पर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
फोटो-13-बलरामपुर के चौकाकला के पास बंधा किनारे कटान करती राप्ती ।-संवाद
फोटो-13-बलरामपुर के चौकाकला के पास बंधा किनारे कटान करती राप्ती ।-संवाद
फोटो-13-बलरामपुर के चौकाकला के पास बंधा किनारे कटान करती राप्ती ।-संवाद
फोटो-13-बलरामपुर के चौकाकला के पास बंधा किनारे कटान करती राप्ती ।-संवाद
फोटो-13-बलरामपुर के चौकाकला के पास बंधा किनारे कटान करती राप्ती ।-संवाद