बलरामपुर के गैड़ासबुजुर्ग में पशुशेड में रहती राम बुझारत की पत्नी। संवाद
गैड़ास बुजुर्ग। थाने के सामने आत्मदाह करने वाले राम बुझारत की मौत को एक साल बीत चुका है। उनके परिवार का दर्द अब भी कम नहीं हुआ है। उनकी पत्नी कुसमा देवी पशुशेड में रहकर किसी तरह जिंदगी काट रही हैं, जबकि तीनों बच्चे रिश्तेदारों के सहारे पल रहे हैं। भले ही राम बुझारत की चिता की राख ठंडी हो चुकी है, लेकिन उनके परिवार का संघर्ष अब भी जल रहा है।
कुसमा की आंखों में आज भी उस दिन का मंजर ताजा है। वे बताती हैं 23 अक्तूबर 2023 को उस दिन सब कुछ खत्म हो गया। अब न घर बचा, न सहारा। सरकार ने कहा था कि मदद मिलेगी, पर मिला सिर्फ एक पशुशेड व 30 हजार रुपये। उसी में मैं अपने छोटे बेटे के साथ रहती हूं। टूटी चारदीवारी और टीन की छत वाला वह पशुशेड अब उनके जीवन का एकमात्र आसरा है।
बरसात के दिनों में पानी टपकता है। गांव वालों का कहना है कि कई बार उन्होंने अधिकारियों से गुहार लगाई कि कुसमा को पक्का घर मिले, पर अब तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। (संवाद)