बलरामपुर के तुलसीपुर में पहुंची पीर रतननाथ की शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु।-संवाद
तुलसीपुर ( बलरामपुर ) नेपाल के दांग घोड़ाही से चलकर पीर रतननाथ की शोभायात्रा नवरात्र पंचमी के दिन बुधवार की सुबह शक्तिपीठ देवी पाटन मंदिर पहुंची। नगर में पीर रतननाथ की शोभायात्रा पर जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। शक्तिपीठ देवीपाटन में पूजा-अर्चना कर मंदिर के पीठाधीश्वर महंत मिथलेश नाथ योगी ने पीर रतन नाथ के पात्र देवता को पवित्र दलीचे पर स्थापित किया। अब यहां नवरात्र दशमी तिथि तक मां पाटेश्वरी के साथ पीर रतननाथ की पूजा-अर्चना भी की जाएगी।
तुलसीपुर नगर की सीमा पर स्थित चंद्र भगवान के मंदिर में सुबह सैकड़ों की संख्या में नगर वासियों ने शोभायात्रा का स्वागत किया । हाथी पर सवार देवीपाटन वार्ड की सभासद मीना किन्नर ने शोभायात्रा में शामिल संत-महंत एवं श्रद्धालुओं पर पैराशूट से पुष्पवर्षा कराई। थारू जनजाति की महिलाओं ने लोकगीत के साथ माता रानी का भजन गाकर सभी को थिरकने पर विवश कर दिया।
शोभायात्रा भगवान चंद्र देव के मंदिर से मिल चुंगी नाका, पुरानी बाजार, हनुमानगढ़ी चौराहा, लाल चौराहा, हरैया तिराहा होते हुए शक्तिपीठ देवीपाटन मंदिर पहुंची। देवीपाटन स्थित समय माता मंदिर में पीठाधीश्वर मिथलेश नाथ योगी ने पीर रतननाथ की शोभायात्रा का स्वागत किया। काल भैरव की पूजा अर्चना के बाद नेपाल के संत-महंत मां के गर्भ ग्रह में पहुंचे यहां पर पीर रतननाथ के पात्र देवता के साथ मां की पूजा-अर्चन करने के बाद मंदिर परिसर में स्थित पवित्र दलीचे पर पात्र देवता को स्थापित किया गया।
मां पाटेश्वरी ने परम भक्त को दिया था वरदान
पीर रतननाथ मां पाटेश्वरी के परम भक्त थे। अपनी सिद्धियों के बल पर वह प्रतिदिन भोर पहर नेपाल के दांग चौखड़ा से मां पाटेश्वरी का दर्शन करने के लिए शक्तिपीठ देवीपाटन आते थे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां पाटेश्वरी ने उन्हें वरदान दिया था कि नवरात्र की पंचमी तिथि से दशमी तिथि तक सभी देवी भक्त मेरे साथ तुम्हारी पूजा भी करेंगे। तब से लेकर अब तक प्रत्येक चैत्र नवरात्र में पीर रतननाथ की शोभायात्रा पंचमी तिथि को शक्तिपीठ देवी पाटन आती है। यात्रा के साथ नेपाल से आने वाले पुजारी ही देवीपाटन मंदिर में दशमी तिथि तक मंदिर की पूजा व्यवस्था संभालते हैं। श्रद्धालु मां पाटेश्वरी के साथ पीर रतननाथ के रूप में उनके पात्र देवता की पूजा-अर्चना करते हैं।