बलरामपुर। एनीमिया व डेंगू समेत कई जानलेवा बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की परेशानी कम होती नहीं दिख रही है। संसाधनों के अभाव में ब्लड बैंक में बने ब्लड सप्रेटर यूनिट का संचालन अबतक शुरू नहीं हो सका है। इससे मरीजों को चढ़ाने के लिए रक्त के सभी तत्व अलग-अलग नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में प्लेटलेट्स, प्लाज्मा व पीआरबीसी की कमी से जूझ रहे मरीजों के तीमारदारों को 42 किमी की दौड़ लगानी पड़ती है।
संयुुक्त जिला चिकित्सालय में ब्लड बैंक संचालित है। यहां मरीजों को केवल खून (कंप्लीट ब्लड) ही मिलता है। खून से प्लाज्मा, प्लेटलेट्स व पैक्ड रेड ब्लड कारपोसेल्स (पीआरबीसी) को अलग करने के लिए ब्लड बैंक में सप्रेटर यूनिट लगनी है। अलग भवन बनकर तैयार है। कई मशीनें आ चुकी हैं लेकिन डीप फ्रीजर की सप्लाई न होने से अबतक इस यूनिट का संचालन शुरू नहीं हो सका है। इसका खामियाजा एनीमिया व डेंगू समेत अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
गोंडा व बहराइच तक दौड़ लगाना मजबूरी
सिविल लाइन निवासी राजू ने बताया कि बेटे को 15 दिन बुखार होने पर उसे प्लेटलेट्स चढ़ना था। बलरामपुर में न मिलने पर गोंडा से प्लेटलेट्स खरीदकर लाए हैं। नहर बालागंज निवासी संदीप ने बताया कि पत्नी को विटामिन की कमी होने पर डॉक्टर ने प्लाज्मा चढ़वाने की सलाह दी। बलरामपुर में प्लाज्मा न मिलने पर पत्नी को बहराइच में भर्ती कराया है।
प्रतिमाह 50 से अधिक मरीज लौटते हैं निराश
ब्लड बैंक के प्रभारी सीपी श्रीवास्तव बताते हैं कि प्रतिमाह ब्लड बैंक से लगभग 550 यूनिट खून मरीजों को दिया जाता है। प्रतिमाह 50 से अधिक मरीज व तीमारदार प्लाज्मा, प्लेटलेट्स व पीआरबीसी लेने आते हैं। सप्रेटर यूनिट संचालित न होने के कारण उन्हें इसके लिए गोंडा व बहराइच ब्लड बैंक भेज दिया जाता है।
डिलीवरी मिलते ही करेंगे लाइसेंस के लिए आवेदन
ब्लड बैंक में शुरू होने वाली सप्रेटर यूनिट के लिए अधिकांश सामान आ गए है। अब सिर्फ डीप फ्रीजर आना बाकी है। उसकी डिलीवरी मिलते ही सप्रेटर यूनिट संचालन के लिए लाइसेंस का आवेदन कर दिया जाएगा। जिससे शीघ्र यूनिट शुरू हो सके।
- डॉ. प्रवीण कुमार, सीएमएस