बलरामपुर। घना जंगल, तेंदुओं की बड़ी आबादी और बाघों की मौजूदगी। प्राकृतिक संपदा से समृद्ध सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग में पर्यटन का बड़ा केंद्र बनने की संभावनाएं हैं। शासन ने यहां लेपर्ड सफारी विकसित करने की योजना को हरी झंडी दे दी है, लेकिन अभी तक बजट आवंटन और निर्माण शुरू होने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। शनिवार को जिले के दौरे पर आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले की योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति देने का ऐलान किया। इससे लेपर्ड सफारी के लिए जल्द बजट जारी होने की उम्मीद जगी है।
वन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-नेपाल सीमा से सटे सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग का क्षेत्रफल करीब 452 वर्ग किलोमीटर है। यहां तेंदुए, बाघ, भालू, हिरन, सांभर और पक्षियों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। जुलाई 2026 में कैमरा ट्रैप के जरिये यहां 150 से अधिक तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई थी। वहीं, बाघों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए वर्ष 2026 में गणना कराई गई है। हालांकि, गणना की रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
सोहेलवा के जंगल को पर्यटन से जोड़ने की पहल पहले ही शुरू हो चुकी है। जरवा क्षेत्र में दारा नाला के पास इको टूरिज्म स्थल विकसित किया गया है। छह नवंबर 2024 को शुरू हुए इस स्थल पर तीन लाख से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं। यहां की हरियाली, प्राकृतिक परिवेश और नेपाल के पहाड़ों का नजारा पर्यटकों को आकर्षित करता है। इसी अनुभव को आगे बढ़ाते हुए सोहेलवा में लेपर्ड सफारी विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत करीब 10 किलोमीटर लंबा नेचर ट्रैक, पक्षी दर्शन स्थल, बोटिंग और होम स्टे जैसी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है। हालांकि, योजना को धरातल पर उतारने के लिए बजट आवंटन और आगे की प्रक्रिया का इंतजार है। - संवाद
लोगों में जगी रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद
जंगल से सटे गांवों के लोगों को भी लेपर्ड सफारी योजना से रोजगार मिलने की उम्मीद है। जरवा के राम नरेश और संतोष कुमार का कहना है कि पर्यटन का विकास होने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। वहीं, मोहकमपुर की रीना और मंजू को भी इस योजना से रोजगार मिलने की उम्मीद है। दोनों महिलाएं स्थानीय उत्पाद तैयार करती हैं। इसके अलावा, एसएसबी की ओर से करीब 100 महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया गया है। सफारी शुरू होने पर इन महिलाओं को भी रोजगार के अवसर मिलने की उम्मीद है।
डीएफओ गौरव गर्ग ने बताया कि सोहेलवा जंगल में सर्वे का काम हो चुका है। लेपर्ड सफारी को शासन से मंजूरी मिल चुकी है। इसके लिए प्रस्ताव की प्रस्तुति भी होनी है। संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित कर जल्द ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।