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कायाकल्प के 14 पैरामीटर पर सिर्फ 123 स्कूल खरे

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बलरामपुर। आपरेशन कायाकल्प के 14 पैरामीटर पर जिले में सिर्फ 123 स्कूल खरे पाए गए हैं। जिले के 450 स्कूलों में अभी तक 13 पैरामीटर पूरे हुए हैं। जिले में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट के 1825 स्कूलों को 14 पैरामीटर पर कायाकल्प कराने का जिम्मा बेसिक शिक्षा के साथ-साथ पंचायती राज विभाग को सौंपा गया है।
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ग्राम पंचायत सचिवों के रुचि न लेने से कायाकल्प का काम आधा-अधूरा है। चालू वित्तीय वर्ष में स्कूलों के कायाकल्प पर अब तक 1.17 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
वित्तीय वर्ष 2021-22 में एक अप्रैल से 19 जुलाई तक पंचायती राज विभाग की तरफ से जिले के सभी नौ ब्लॉकों में स्कूलों के कायाकल्प पर एक करोड़ 17 लाख 41 हजार रुपये खर्च कर दिए गए हैं।
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शिक्षा क्षेत्र सदर में 70, शिवपुरा में 67, तुलसीपुर में 71, गैसड़ी में 49, पचपेड़वा में 44, श्रीदत्तगंज में 59, उतरौला में 58, गैड़ास बुजुर्ग में 39 व रेहरा बाजार में 66 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट स्कूलों का कायाकल्प कराया जा सका है।
जिले में 14 पैरामीटर के मानक पर 1825 की तुलना में अब तक सिर्फ 123 स्कूलों में ही कायाकल्प पूर्ण हुआ है जिसमें पीने के लिए पानी, बच्चों के लिए टॉयलेट, पानी से युक्त टॉयलेट, टाइल्स युक्त टॉयलेट, हैंड वाशिंग यूनिट, क्लासरुम में टाइल्स, ब्लैकबोर्ड, किचन, पेंटिंग, रैंप, विद्युतीकरण और बिजली कनेक्शन शामिल हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग के जिला समन्वयक नर्माण एनके सिंह ने बताया कि जिले के 450 स्कूलों को 13 पैरामीटर के मानक पर कायाकल्प कराया जा चुका है। दिव्यांग बच्चों के लिए टॉयलेट का निर्माण ही 450 स्कूलों में बचा है जिसे शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा।
जिले के 546 स्कूलों को 12 पैरामीटर पर कायाकल्प कराया जा चुका है। 354 स्कूलों में 11 पैरामीटर, 157 स्कूलों में 10 पैरामीटर, 103 स्कूलों में नौ पैरामीटर, 54 स्कूलों में आठ पैरामीटर, 14 स्कूलों में सात पैरामीटर, 12 स्कूलों में छह पैरामीटर, सात स्कूलों में पांच पैरामीटर, तीन स्कूलों में चार पैरामीटर और एक स्कूल में तीन पैरामीटर पर कायाकल्प के मानक पर कार्य कराए गए हैं।
बीईओ व हेडमास्टरों का कहना है कि पंचायती राज विभाग की तरफ से स्कूलों में कायाकल्प में रुचि न लेने के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है। ग्राम पंचायत सचिवों को स्कूलों के कायाकल्प पर धनराशि खर्च करनी है जिसमें घोर लापरवाही बरती जा रही है।
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