बलरामपुर। नए शैक्षिक सत्र 2026-27 से परिषदीय स्कूलों के विद्यार्थियों के रिपोर्ट कार्ड का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। अब रिपोर्ट कार्ड में नंबरों की लंबी सूची नहीं होगी, बल्कि बच्चों की सीखने की क्षमता, प्रगति और समग्र विकास को ग्रेड और स्टार के माध्यम से दर्शाया जाएगा।
जुलाई में जिले के 1814 परिषदीय विद्यालयों के करीब दो लाख विद्यार्थियों को पहली बार नया समग्र रिपोर्ट कार्ड वितरित किया जाएगा। इसमें केवल परीक्षा परिणाम ही नहीं, बल्कि बच्चे की सीखने की गति, व्यवहार, सहभागिता और अभिभावकों की प्रतिक्रिया भी दर्ज होगी। सहायक शिक्षा निदेशक राम सागर पति त्रिपाठी ने बताया कि केवल अंकों के आधार पर बच्चे की क्षमता का आकलन नहीं किया जा सकता। कई बार कम अंक पाने वाला छात्र व्यवहार, रचनात्मकता या अन्य गतिविधियों में बेहतर होता है।
नई व्यवस्था में रिपोर्ट कार्ड में अभिभावकों और विद्यार्थियों का फीडबैक भी शामिल होगा। इससे यह केवल परीक्षा परिणाम का दस्तावेज न रहकर बच्चे की शैक्षिक यात्रा का समग्र रिकॉर्ड बन जाएगा। रिपोर्ट कार्ड पर क्यूआर कोड भी दर्ज होगा। इसे मोबाइल से स्कैन करने पर छात्र की शैक्षिक प्रगति और अन्य जानकारियां ऑनलाइन भी देखी जा सकेंगी। इससे रिपोर्ट कार्ड डिजिटल तौर पर भी सुरक्षित रहेगा।
ग्रेड से तय होगी विद्यार्थी की क्षमता
विभाग की ओर तय की गई व्यवस्था में रिपोर्ट कार्ड में विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को तीन अलग-अलग श्रेणियों में दर्शाया जाएगा। स्काई (तीन स्टार) सर्वोच्च श्रेणी होगी। इसमें शामिल विद्यार्थियों को कक्षा के अनुरूप उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाला माना जाएगा। यह श्रेणी खुले आकाश की तरह असीम संभावनाओं और आत्मविश्वास का प्रतीक होगी। माउंटेन (दो स्टार) के विद्यार्थी सीखने की प्रक्रिया में मजबूत पकड़ बना चुके होंगे और लगातार आगे बढ़ रहे होंगे। स्ट्रीम (एक स्टार) शुरुआती स्तर होगा। ऐसे विद्यार्थियों में सीखने की नींव तैयार हो चुकी होगी, लेकिन उन्हें अभी अतिरिक्त मार्गदर्शन और अभ्यास की जरूरत होगी।
91 से 100 प्रतिशत अंक पर मिलेगा ए-ग्रेड
रिपोर्ट कार्ड में अंक नहीं दिखेंगे, लेकिन परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर ग्रेड तय होंगे। 91 से 100 प्रतिशत अंक पाने वाले विद्यार्थियों को ए-1 ग्रेड मिलेगा, जबकि 81 से 90 प्रतिशत तक ए-2, 71 से 80 प्रतिशत तक बी-1, 61 से 70 प्रतिशत तक बी-2, 51 से 60 प्रतिशत तक सी-1, 41 से 50 प्रतिशत तक सी-2, 33 से 40 प्रतिशत तक डी-1 तथा 32 प्रतिशत या उससे कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को डी-2 ग्रेड दिया जाएगा। रिपोर्ट कार्ड में प्रथम सत्र, अर्द्धवार्षिक, द्वितीय सत्र और वार्षिक परीक्षा के ग्रेड भी दर्ज होंगे, जिससे पूरे वर्ष की शैक्षिक प्रगति का आकलन किया जा सकेगा।