उतरौला। जन्म के बाद शुरुआती दो महीने नवजात के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान बच्चे की सेहत पर लगातार नजर रखने और किसी भी परेशानी का समय पर पता लगाने के लिए जिले में ‘नन्हे-कदम’ एप की शुरुआत की गई है। मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) उतरौला से इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ। पहले चरण में उतरौला क्षेत्र में जन्म से दो माह तक के सभी नवजात शिशुओं को निगरानी व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।
इस पहल के तहत नवजात की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। आशा और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) घर-घर जाकर बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति और देखभाल से जुड़ी जरूरी जानकारी एप पर दर्ज करेंगे। मां और परिवार के सदस्यों से मिली जानकारी को भी निगरानी व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। इससे स्वास्थ्यकर्मियों को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कौन सा नवजात स्वस्थ है और किस बच्चे को अतिरिक्त देखभाल या चिकित्सकीय परामर्श की जरूरत है।
मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु गुप्ता के सहयोग और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से शुरू की गई इस पहल का मार्गदर्शन जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज, कानपुर के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. यशवंत राव कर रहे हैं। शुभारंभ के अवसर पर सीएचसी उतरौला में आशा और सीएचओ की बैठक हुई। डॉ. यशवंत राव ने एप के इस्तेमाल और नवजात की निगरानी की प्रक्रिया की जानकारी दी। सीडीओ ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के दौरान एप से मिले अनुभव और परिणामों का आकलन किया जाएगा। सफल परिणाम मिलने पर इसे जिले के अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।
ऐसे मिलेगी शिशु और मां को स्वास्थ्य सुविधा
नवजात के जन्म के बाद उसे निगरानी व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। इसके बाद शुरुआती दो महीने तक स्वास्थ्यकर्मी बच्चे की स्थिति की जानकारी लेते रहेंगे। यदि किसी बच्चे के स्वास्थ्य में परेशानी सामने आती है तो उसकी जानकारी समय रहते स्वास्थ्य व्यवस्था तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
मसलन, यदि बच्चा सामान्य रूप से दूध नहीं पी रहा है, उसकी तबीयत में कोई बदलाव है या परिवार को नवजात की देखभाल को लेकर परेशानी हो रही है तो आशा या सीएचओ के माध्यम से इसकी जानकारी एप पर दर्ज की जा सकेगी। जरूरत के अनुसार परिवार को चिकित्सकीय सलाह और स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचने के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा।
एप के माध्यम से केवल बच्चे की निगरानी ही नहीं, बल्कि परिवार को नवजात की देखभाल के प्रति जागरूक करने में भी मदद मिलेगी। आशा और सीएचओ घर जाकर परिवार को नवजात की नियमित देखभाल, समय पर स्वास्थ्य जांच और किसी असामान्य लक्षण की स्थिति में स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की जानकारी देंगे।