बलरामपुर। भारत-नेपाल दोहरी नागरिकता कांड में अब प्रशासनिक कार्रवाई और पुलिस विवेचना समानांतर गति से आगे बढ़ रही है। एफआईआर में नामजद 27 आरोपियों के नाम बलरामपुर की मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी विपिन कुमार जैन ने संबंधित निर्वाचन अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर पूरी कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
दूसरी ओर, पुलिस अब इस पूरे मामले को केवल मतदाता सूची तक सीमित न रखकर भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेजों के पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुट गई है। निर्वाचन विभाग मतदाता सूची में संशोधन की वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर रहा है। नाम विलोपन के बाद संशोधित अभिलेख तैयार किए जाएंगे और पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट जिला निर्वाचन अधिकारी को भेजी जाएगी। प्रशासन इसे केवल मतदाता सूची संशोधन की कार्रवाई मान रहा है, जबकि पुलिस इसे विवेचना के अगले और महत्वपूर्ण चरण का आधार मानकर आगे बढ़ रही है।
विवेचना से जुड़े सूत्र बताते हैं कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन 27 लोगों के नाम मतदाता सूची में दर्ज हुए, उनकी भारतीय पहचान की शुरुआत आखिर किस दस्तावेज से हुई। पुलिस इसी बिंदु पर पूरी दस्तावेजी शृंखला तैयार कर रही है। सूत्रों का कहना है कि विवेचना अब केवल लाभार्थियों तक सीमित नहीं रहेगी। जिन अधिकारियों, कर्मचारियों या अन्य व्यक्तियों की भूमिका दस्तावेज तैयार कराने, सत्यापन करने अथवा अनुमोदन देने में सामने आएगी, उनकी भूमिका भी साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी।
इनके नाम दर्ज हुई एफआईआर
एफआईआर में अब्दुल कादिर सिद्दीकी, सलीम सिद्दीकी, अब्दुल अजीज सिद्दीकी, अब्दुल अलीम सिद्दीकी, अब्दुल वहीद सिद्दीकी, अब्दुल करीम सिद्दीकी, अब्दुल रहीम, जकरुन्निशा, जाहिर खातून, हलिमा खातून, रेशमा, कमाल अहमद, जमीला, शाहिद अख्तर, सनाउल्ला सिद्दीकी, निशरत नूरसबा, यासिर अराफात, ओसामा, मोहम्मद अनस सिद्दीकी, फातिमा सिद्दीकी समेत कुल 27 लोगों को नामजद किया गया है। इनके नाम मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई की जा रही है।