बलरामपुर के उतरौला में तकरीर करते सिया समुदाय के लोग ।-संवाद
उतरौला। नगर स्थित इमामबारगाह हाजी तुल्लन हुसैन साहब में आयतुल्लाह अली खामनेई की शहादत पर एक शोकसभा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में विभिन्न उलमाओं और वक्ताओं ने अपने संबोधन में उनके जीवन, विचारों और संघर्षों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।
शोकसभा की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन से हुई, जिसके बाद मौलाना फिदा हुसैन, मौलाना मुहम्मद अली और मौलाना ज़ायर अब्बास ने अपने-अपने संबोधन में आयतुल्लाह अली खामनेई को श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में सत्य, न्याय और इंसाफ की आवाज बुलंद करने का काम किया, जिससे दुनिया भर के लोगों को प्रेरणा मिली। कार्यक्रम का संचालन शायर शुजा उतरौलवी ने किया। मौलाना शाहकार हुसैन जैदी ने कहा कि ऐसे व्यक्तित्व हमेशा समाज को संघर्ष और धैर्य का संदेश देते हैं।
लखनऊ से आए इस्लामिक स्कॉलर मौलाना हैदर अब्बास ने कहा कि ऐसे नेताओं की सोच और विचारधारा समाज को दिशा देने का काम करती है। मौलाना जमाल हैदर हल्लौरी ने अपने संबोधन में कहा कि जो लोग सत्य और मानवता के लिए जीवन समर्पित करते हैं, वे दुनिया से जाने के बाद भी लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं। उन्होंने लोगों से आपसी एकता और भाईचारे को मजबूत करने की अपील की। अंत में ईरान के कुम में शिक्षा कार्य से जुड़े मौलाना अली अब्बास खान ने मजलिस को संबोधित करते हुए कहा कि समाज को अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होने की जरूरत है। उन्होंने शांति, सद्भाव और मानवता के संदेश को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।