बलरामपुर। स्वास्थ्य विभाग में हुए बहुचर्चित करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। विजिलेंस ने जांच के दौरान 50 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उनकी सूची तैयार की है। सूत्रों के मुताबिक, इन सभी से जल्द चरणबद्ध तरीके से पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है तथा कई नए तथ्य सामने आने की संभावना है।
जांच में वर्ष 2014 से 2022 के बीच दवाओं, चिकित्सा उपकरणों की खरीद, जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और विभिन्न मरम्मत कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की पड़ताल की जा रही है। विजिलेंस फर्जी बिलों, संदिग्ध फर्मों के माध्यम से भुगतान और नियमों की अनदेखी कर सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।
इस मामले में विजिलेंस पहले ही पूर्व सपा विधायक मुकेश श्रीवास्तव, उनके भाई अजय श्रीवास्तव, तत्कालीन सीएमओ डॉ. घनश्याम सिंह, डॉ. एस.डी. भारती, तत्कालीन सीएमएस डॉ. प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, चीफ फार्मासिस्ट के.के. मालवीय तथा विभागीय अवर अभियंता राम मनोरथ मौर्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर चुकी है।
अब जांच एजेंसी ने घोटाले की अवधि में जिले के सभी नौ सीएचसी अधीक्षकों, 30 पीएचसी प्रभारी चिकित्साधिकारियों, तत्कालीन सीएमओ, सीएमएस तथा संबंधित लिपिकों की सूची भी तैयार की है। सूत्रों के अनुसार, इनकी भूमिका की बिंदुवार जांच की जा रही है। विशेष रूप से खरीद प्रक्रिया, भुगतान, सामग्री के सत्यापन और अभिलेखों के रखरखाव में नियमों के पालन की जांच की जा रही है।
जांच के दौरान विजिलेंस को कई ऐसे दस्तावेज मिले हैं, जो खरीद और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। कुछ अभिलेख पहले ही कब्जे में लिए जा चुके हैं, जबकि अन्य रिकॉर्ड का मिलान जारी है। पूछताछ और वित्तीय अभिलेखों के मिलान के बाद यदि नए साक्ष्य मिलते हैं तो मामले में नई एफआईआर दर्ज होने के साथ गिरफ्तारियों का दायरा भी बढ़ सकता है।