बलरामपुर में छत पर खेल रही बच्ची को बंदर ने धक्का दे दिया। नीचे गिरने से उसकी मौत हो गई। लाश देख घरवाले चीत्कार उठे। बंदरों के उत्पात से परेशान ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। आगे पढ़ें पूरी खबर...
यूपी के बलरामपुर में शुक्रवार को घर की छत पर खेल रही बालिका को बंदर ने धक्का दे दिया। इससे नीचे गिरकर उसकी मौत हो गई। घटना के बाद घर में चीख पुकार मच गई। गांव में मातम छा गया। ग्रामीणों ने प्रदर्शन करके बंदरों को पकड़ने की मांग की।
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घटना हरैया सतघरवा क्षेत्र के गौरामाफी गांव की है। गांव निवासी अशोक कुमार की पुत्री शुभी (9) शाम करीब 7 बजे घर की छत पर अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। इसी दौरान अचानक छत पर पहुंचे बंदर ने बच्ची को धक्का दे दिया।
अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया
छत से गिरने के बाद शुभी गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजन उसे आनन-फानन निजी वाहन से जिला संयुक्त चिकित्सालय ले गए। वहां हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने बहराइच के लिए रेफर कर दिया। बहराइच ले जाते समय रास्ते में रात करीब 12 बजे उसने दम तोड़ दिया।
बच्ची की मौत से परिजनों में कोहराम मच गया। मां कृष्णावती ने बताया कि सात बच्चों में शुभी चौथे नंबर पर थी। परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम कराए ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया। घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
दो दर्जन से अधिक लोग हो चुके हैं घायल
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले छह माह से क्षेत्र में बंदरों के उत्पात से लोग परेशान हैं। अब तक दो दर्जन से अधिक लोग बंदरों के हमले में घायल हो चुके हैं। कई महिलाओं पर भी बंदरों ने हमला किया है। इससे हाथ-पैर और कमर में चोटें आई हैं।
ग्रामीण रमेश, वसीम, प्रभुदयाल, लल्लन, मिथुन, रवि कुमार, विकास, आदर्श, लालजी, शिवकुमार, बालगोविंद, किशोरी लाल, कमला प्रसाद, रंजीत व नंदराम ने बताया कि फतेहरा, पूरनपुर, भुजेहरा, लछुआपुर, कमदा, गुलरिहा और हिसामपुर सहित आसपास के गांवों में भी बंदरों का उत्पात है।
पंचायत राज विभाग ने साधी चुप्पी, वन विभाग ने दी मदद
बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी पंचायतों को सौंप दी गई है। इसके बाद भी विभाग चुप्पी साधे है। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रदर्शन नाराजगी जताई और बंदरों को पकड़ने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं की गई।
वहीं, शनिवार दोपहर बरहवा रेंज के रेंजर बृजेश सिंह परमार टीम के साथ गांव पहुंचे और पीड़ित परिवार को नकद सहायता राशि देकर सांत्वना दी। उन्होंने आश्वासन दिया पंचायत राज विभाग से समन्वय स्थापित कर बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई की जाएगी। डीपीआरओ श्रेया उपाध्याय ने बताया कि वह मामले की जांच कराएंगी।
आपदा से राहत का प्रावधान नहीं
आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह ने बताया कि आपदा राहत से बंदर के हमले में मौत से सहायता देने का प्रावधान नहीं है। वन्यजीव की श्रेणी से बंदर अलग कर दिया गया है। ऐसे में मुख्यमंत्री राहत कोष या अन्य किसी योजना से ही सहायता मिल सकती है। फिलहाल जानकारी करके उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट दी जाएगी।