बलरामपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। इस योजना से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक रूप से मदद भी कर रही हैं। मनरेगा में महिलाओं को श्रमिकों के साथ ही ''महिला मेट'' की जिम्मेदारी भी दी गई है, जिससे उनकी संख्या में वृद्धि हुई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए बहुत ज्यादा रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं है, लेकिन मनरेगा ने महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया है। जब से मनरेगा में महिलाओं को ''महिला मेट'' की जिम्मेदारी मिली है, तब से महिला श्रमिकों की संख्या भी बढ़ गई है। इस वित्तीय वर्ष में जनपद में मानव कार्य दिवस सृजन का लक्ष्य 31 लाख 37 हजार 130 दिन रखा गया था। सितंबर में ही कुल 22 लाख 72 हजार 345 मानव कार्य दिवस पूरे हो चुके हैं। इसमें से महिलाओं की भागीदारी आठ लाख 81 हजार 966 कार्य दिवस है, जो कुल सृजित मानव दिवस का करीब 39 प्रतिशत है। महिला मजदूरों को प्रमोट करके मेट बनाया गया है। तभी से मनरेगा में महिला मजदूरों की भागीदारी बढ़ी है। इससे घर की आय में महिलाओं की भी हिस्सेदारी जुड़ रही है। पहले मनरेगा में महिला मजदूरों की संख्या काफी कम होती थी। (संवाद)
मनरेगा में महिला मजदूरों की स्थिति
नौ ब्लाॅक वाले इस जिले में 1,55,540 महिला श्रमिक काम करती हैं, जाे कुल श्रमिकों का 34.77 प्रतिशत है। इसमें सबसे अधिक महिला श्रमिक पचपेड़वा में 41.16 प्रतिशत है। जबकि सबसे कम बलरामपुर ब्लाॅक में 30.16 प्रतिशत ही है।
जिले में हैं 1001 महिला मेट
50 श्रमिकों पर एक को मेट की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। जनपद में 1001 महिला मेट हैं। महिला श्रमिकों को प्रमोट कर मेट बनाया गया है। इन महिलाओं को मेट के कामकाज की बारीकियां सिखाई गईं और जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण दिया गया। - कमलेश कुमार सोनी, डीसी मनरेगा बलरामपुर