बलरामपुर। जिंदगी में चुनौतियां आती रहती हैं। समाज में कई ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने हालात को कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया, बल्कि मेहनत के बल पर खुद की तकदीर लिखने लगीं। महिलाओं का यह संघर्ष और हुनर परिवारों को संबल दे रहा हैं। कुछ महिलाओं ने परिवार की बेहतरी के लिए पति के कंधे से कंधा मिलाकर परिवार को आर्थिक उन्नति देने का काम किया है। ऐसी ही सदर ब्लॉक के सिसई गांव की महिला सुनीता वर्मा हैं। जिन्होंने अपने आसपास के गांवों में 35 समूहों की 175 महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर मिसाल कायम की है। गरीबी से उबरने के लिए संघर्ष किया और खुद को आत्मनिर्भर बनाकर आर्थिक रूप से संपन्न बनीं। स्वरोजगार से जुड़ी गांव की महिलाएं अब उन्हें लखपति दीदी के नाम से पुकारती हैं।
वर्ष 2018 में सुनीता वर्मा समूह की सदस्य बनीं। बताती हैं कि उनका परिवार गरीबी के कर्ज से दबा हुआ था। इस दौरान सरकार ने समूहों के गठन की शुरुआत की। अपने समूह का गठन करने के बाद उन्होंने महिलाओं को जोड़ना शुरू किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से समूह केे संचालन के लिए आर्थिक मदद दी गई। करीब दो लाख रुपये की मदद पाकर उन्होंने समूह का विस्तार शुरू कर दिया। बताती है कि कोराेना काल में सबसे अच्छा मास्क तैयार किया गया था। समूह से तैयार किए गए मास्क लोगों को सुरक्षा के लिए दिए गए। समूह की महिलाओं ने सिलाई-कढ़ाई से आय के स्रोत बढ़ाए। बाद में उन्हें बैंक सखी के पद पर काम करने की जिम्मेदारी दी गई। कड़ी मेहनत कर उन्होंने अब तक 35 समूहों का गठन करा दिया है। एक समूह में 12 से 15 महिलाओं को जोड़कर सक्रिय कर दिया। सुनीता की इस समय 20 से 25 हजार रुपये प्रतिमाह की आमदनी है। (संवाद)
10 हजार से एक लाख तक दिलाया कर्ज
-समूहों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए 10 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक बैंकों से ऋण दिलाया। प्रत्येक समूह की पांच से छह महिलाओं ने बैंकों से कर्ज लेकर अपना कारोबार शुरू किया। किराना स्टोर, ब्यूटी पार्लर, पशुपालन, फर्नीचर निर्माण, मिट्टी के बर्तनों को बनाने, खेती करने व ई रिक्शा संचालन जैसे क्षेत्रों में उन्होंने 175 से अधिक दीदी को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया।
परास्नातक की पढ़ाई करने की ललक
-सुनीता बताती हैं कि 2011 में सिसई निवासी राहुल के साथ शादी हुई थी। तब हाईस्कूल ही पास थी। ससुराल में इंटरमीडिएट पास किया। स्नातक की पढ़ाई भी पूरी कर ली है। परास्नातक की पढ़ाई पूरी करने की मन इच्छा है।
समूहों के लिए बनी प्रेरणादायक
-सिसई गांव की सुनीता वर्मा स्वयं सहायता समूह की पहली सदस्य बनीं। समूहों को बढ़ाने में उनका उत्कृष्ट योगदान है। समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए प्रेरणादायक हैं।
मंजू त्रिवेदी, डीसी एनआरएलएम