बलरामपुर। विद्यालयों में बच्चों की अपार आईडी बनवाना शिक्षकों के लिए मुसीबत बन गया है। विद्यार्थी या उनके अभिभावकों के आधार कार्ड में त्रुटि के कारण अपार आईडी जनरेट नहीं हो पा रही है। वहीं दूसरी तरफ शत प्रतिशत बच्चों का अपार आईडी न बनने पर शिक्षकों पर कार्रवाई की तलवार भी लटक रही है। शिक्षकों का कहना है कि या तो साफ्टवेयर में बदलाव किया जाए या फिर हम लोगों पर शत प्रतिशत विद्यार्थियों का अपार आईडी जनरेट करने का दबाव न बनाया जाए।
विशिष्ट पहचान के लिए कक्षा एक से लेकर उच्च शिक्षा तक के प्रत्येक विद्यार्थी का अपार आईडी बनाई जानी है। अपार आईडी बनाने के लिए सभी विद्यालयों में अभियान चलाया जा रहा है। विद्यालय के शिक्षकों को शत प्रतिशत बच्चों का अपार आईडी बनाने का निर्देश दिया गया है। शिक्षकों का कहना है कि अधिकांश अभिभावक अपने बच्चे का आधार कार्ड बनवाते समय नाम की स्पेलिंग आदि पर ध्यान नहीं देते हैँ। जिसके कारण विद्यालय की प्रवेश पंजिका एवं आधार कार्ड में बच्चे अथवा अभिभावक का नाम मैच नहीं करता है। करीब 30 से 40 फीसदी विद्यार्थियों के आधार कार्ड में उनके अथवा अभिभावक के नाम में त्रुटि है। ऐसे में तमाम प्रयास के बाद भी इन विद्यार्थियों का अपार आईडी स्कूल स्तर से जनरेट नहीं हो पा रहा है।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह ने बताया कि अपार आईडी के साफ्टवेयर में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि आधार कार्ड में संशोधन करके अपार आईडी जनरेट कराया जा सके। इसके बावजूद शत प्रतिशत अपार आईडी बनवाने को लेकर विभागीय अधिकारी शिक्षकों पर कार्रवाई का दबाव बना रहे हैं। मांग की कि शिक्षकों पर दबाव बनाने की जगह अपार आईडी के साफ्टवेयर में बदलाव कराया जाए ताकि विद्यालय स्तर से संशोधन करके सभी बच्चों की अपार आईडी जनरेट की जा सके।