मदरसा दारूल उलूम इमाम-ए-आजम में दुआ मांगते उलेमा व छात्राएं ।-संवाद
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बलरामपुर। हदीस शरीफ की सबसे प्रामाणिक और विश्वसनीय पुस्तक बुखारी शरीफ है। कुरआन और हदीस के बताए मार्ग पर चलकर ही एक बेहतर और मुकम्मल जिंदगी गुजारी जा सकती है। हदीस शरीफ, कुरआन-ए-पाक की व्याख्या और मार्गदर्शक है जिनके बिना कुरआन की शिक्षाओं को सही रूप में समझना संभव नहीं है।
यह विचार सोमवार को नगर के मोहल्ला बलुहा स्थित मदरसा दारुल उलूम इमाम ए आजम लिलबनात में आयोजित खत्म बुखारी शरीफ कार्यक्रम के अवसर पर शहर मुफ्ती मौलाना मसीह अहमद कादरी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मंगलवार को मदरसे की 17 छात्राओं को आलिम और किराअत की डिग्रियां प्रदान की जाएंगी। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे अपनी तालीम की रोशनी को समाज में फैलाएं और दीन की खिदमत करें।
कार्यक्रम में मदरसे के प्रबंधक मौलाना मोहम्मद उमर एवं कारी फरियाद हुसैन ने कहा कि मुसलमानों के लिए कुरआन ए पाक के बाद बुखारी शरीफ सबसे अफजल किताब है। इसमें अल्लाह के रसूल हजरत मोहम्मद के फरमानों को इमाम ए बुखारी रहमतुल्लाह अलैह ने संकलित किया है। इस महान हदीस ग्रंथ के अध्ययन से जीवन से जुड़े हर प्रश्न का मार्गदर्शन प्राप्त होता है। इस अवसर पर मौलाना कासिम अख्तर, मौलाना अब्दुल कय्यूम और कारी शकील अहमद ने भी छात्राओं को बुखारी शरीफ की अहमियत से अवगत कराया।