बलरामपुर। तीन दिनों तक रौद्र रूप धारण करने के बाद राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर नीचे आ गया है। जलभराव के चलते यहां के ग्रामीणों की जिंदगी छत और नाव के सहारे चल रही है। इससे बाढ़ में फंसे ग्रामीणों को राशन व दवा के साथ अन्य दैनिक उपयोग के समान के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं पहाड़ी नाले ने हरैया क्षेत्र में कटान शुरू कर दी है।
तुलसीपुर विकासखंड पटोहाकोट के ग्राम प्रधान केसरी सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत के मजरे चिकनौटा में अभी भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है। गांव के लोग छत पर खाना बनाते हैं। खरझार पहाड़ी नाले के पुल पर गांव के लोग अपने पशुओं को लेकर रह रहे हैं। सुबह-शाम नाव से जाकर खाना लाते हैं। नाले में बाढ़ से गांव से जाने वाली सड़क कटने के कारण आवागमन बंद है। राहगीर दूसरे के खेत से होकर किसी तरह से निकलते हैं।
बरगदहीपुरवा गांव के विद्यालय के परिसर में अभी भी बाढ़ का पानी भरा हुआ है। गांव से चंदन जोत जाने वाले सड़क पर कई जगह बाढ़ का पानी भरा है। लोग जान जोखिम में डालकर बाढ़ के पानी से निकल रहे हैं। चिकनौटा, चंदनजोत, साखीरेत, सुखदेवपुरवा, हिम्मतपुरवा, कौवा, किठूरा में आवागमन बंद है।
बाढ़ से गन्ने की फसल खराब हो गई है। ग्रामीण राकेश वर्मा, शिव कुमार, राधेश्याम, निब्बर, कृष्णानंद ने बताया कि खराब हुई फसल का मुआवजा दिलाने की मांग की है। तहसीलदार जीआर वर्मा ने बताया कि बाढ़ क्षेत्र में लेखपालों को निगरानी के लिए लगाया गया है। खरझार पहाड़ी नाले के पास जो सड़क कटी है, उसे जल्द ही सही कराया जाएगा।
नाव पर बरात
बरगदहीपुरवा निवासी धनीराम ने बताया कि उनके बेटे की शादी बलरामपुर धुसाह में थी। बृहस्पतिवार को भी बराती गांव से चिकनौटा तक नाव से आए थे, आज वापस गांव जाते समय भी नाव से सामान व बहु नाव से ले जाना पड़ा है।