उतरौला। ऑनलाइन दाखिल-खारिज की व्यवस्था के विरोध में अधिवक्ताओं का आंदोलन मंगलवार को और उग्र हो गया। अधिवक्ता संघ के बैनर तले वकीलों ने तहसील परिसर से जुलूस निकालकर श्याम प्रसाद मुखर्जी चौराहे पर चक्का जाम कर दिया। करीब एक घंटे तक चले प्रदर्शन से आवागमन बाधित रहा और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। इससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जाम की स्थिति को देखते हुए पुलिस ने करीब एक किलोमीटर दूर आंबेडकर चौराहे से ही वाहनों को डायवर्ट कर दिया। चक्का जाम समाप्त होने के बाद ही लोगों को राहत मिली।
अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रह्लाद यादव और महामंत्री रवि शंकर मिश्र के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मौके पर पहुंचे अपर जिलाधिकारी संदीप केला ने अधिवक्ताओं से वार्ता की और उनकी मांगों को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके बाद अधिवक्ताओं ने चक्का जाम समाप्त किया।
चक्का जाम के दौरान शहर के सुभाषनगर, रफीनगर मोहल्ले के साथ ही बलरामपुर, डुमरियागंज और बस्ती से आने वाले लोग भी जाम में फंसे रहे। बस्ती के विकास कुमार ने बताया कि उन्हें पटेल नगर में रिश्तेदार के यहां जाना था, लेकिन आधे घंटे से जाम में फंसे हैं। इसी तरह बलरामपुर से आने वाले रशीद ने बताया कि उन्हें मनकापुर जाना है, लेकिन जाम में फंस गए। जाम के चलते लोगों को मनकापुर जाने के लिए महदेइया होकर जाना पड़ा। करीब एक घंटे तक लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
बार संघ अध्यक्ष ने कहा कि जब तक ऑनलाइन दाखिल-खारिज की व्यवस्था वापस नहीं ली जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अध्यक्ष ने बताया कि स्कूल बसों और एंबुलेंस को जाम में आने पर रास्ता दिया गया। प्रदर्शन में देवेंद्र कुमार, अमित कुमार, आलोक गुप्त, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, सुधीर श्रीवास्तव, निजाम अंसारी, अखिलेश यादव, अनीसुल हसन, खलील खान, गिरीश पांडे, लालजी मिश्र, भूपेंद्र सिंह, बीके सिंह, विनय श्रीवास्तव, शादाब खान, मनीष पांडेय, गजफर अली, श्वेता सिंह, रश्मि सिंह, आयशा फैजान, मनोज शर्मा सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
दस दिन से थमे बैनामे, उम्मीद लेकर पहुंचे लोग मायूस लौटे
अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण उपनिबंधक कार्यालय में पिछले दस दिनों से बैनामा सहित अन्य दस्तावेजों का पंजीकरण बंद है। इससे जमीन की खरीद-फरोख्त पूरी तरह ठहर गई है। रोज सुबह उम्मीद लेकर पहुंचने वाले लोग शाम तक इंतजार के बाद खाली हाथ लौट रहे हैं। किसी का जमीन का सौदा अटका है तो किसी की जरूरत के लिए होने वाला भुगतान रुक गया है। लगातार चक्कर लगाने से लोगों का समय, पैसा और धैर्य तीनों जवाब देने लगे हैं।
तख्तरवा की कांति देवी, पचौथा निवासी अफजल, पीडिया बुजुर्ग के मकसूद अहमद और उतरौला ग्रामीण के इरफान अली समेत अनेक लोग कई दिनों से उपनिबंधक कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। उनका कहना है कि जमीन की खरीद-फरोख्त की सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन बैनामा दर्ज न होने से पूरा लेनदेन अधर में लटक गया है। दूर-दराज से आने वाले लोगों की परेशानी और भी बढ़ गई है। सबसे ज्यादा नाराजगी इस बात को लेकर है कि बैनामा कब शुरू होगा, इसकी भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।
जिला मुख्यालय में भी बहिष्कार, 214 मुकदमों की सुनवाई टली
जिला मुख्यालय में भी मंगलवार को अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। इसके चलते तहसील के विभिन्न न्यायालयों में सूचीबद्ध 214 मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी। न्यायिक कार्य ठप रहने से दूर-दराज से पहुंचे फरियादियों को बिना सुनवाई के ही मायूस होकर लौटना पड़ा।
हड़ताल के कारण उपजिलाधिकारी मनोज कुमार सरोज के न्यायालय में सूचीबद्ध 59, तहसीलदार शशांक शेखर मिश्रा के न्यायालय में 53, तहसीलदार न्यायिक के न्यायालय में 64, नायब तहसीलदार पूर्वी के न्यायालय में 16 तथा नायब तहसीलदार मथुरा के न्यायालय में 22 मामलों की सुनवाई नहीं हो सकी। इससे न्यायिक व्यवस्था प्रभावित रही।
फरियादी पप्पू ने बताया कि वह 40 किलोमीटर दूर से सुनवाई के लिए आए थे, लेकिन हड़ताल के कारण निराश होकर लौटना पड़ा। वहीं महाराज दीन ने कहा कि सुनवाई टलने से उन्हें आर्थिक और समय दोनों की क्षति उठानी पड़ी। अब उन्हें अगली तारीख का इंतजार करना पड़ेगा।
फोटो-17-बलरामपुर के उतरौला में पैदलमार्च निकालकर मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते अधिवक्ता ।