फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Balrampur News: पंजाब-हरियाणा तक हो रही थी खैर की सप्लाई, रेंजर करता था मदद

विज्ञापन
विज्ञापन
बलरामपुर। सोहेलवा वन्यजीव प्रभाग के जंगलों में वर्षों से चल रहे खैर लकड़ी (लाल सोना) तस्करी के खेल का भंडाफोड़ हुआ है। इसकी मांग हरियाण और पंजाब के साथ ही कन्नौज में भी है। कन्नौज में इस लकड़ी का प्रयोग इत्र बनाने, तो हरियाणा व पंजाब में कत्था व बेशकीमती फर्नीचर के काम में आता है। करीब पांच हजार रुपये प्रति किलो की दर से बिकने वाली लकड़ी की नेपाल और थाइलैंड में भी अच्छी मांग है। इसी कारण इसकी व्यापक स्तर पर तस्करी हो रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार बलरामपुर के साथ ही खैर तस्करों के तार महराजगंज और कुशीनगर से भी जुड़े हैं।
विज्ञापन

शुक्रवार की रात पुलिस को सूचना मिली कि गिरोह के लोग लकड़ी लादकर लखनऊ भेजने वाले हैं। हरैया रेंज की सीमा में जैसे ही संदिग्ध ट्रक दाखिल हुआ, पुलिस ने पीछा किया। ट्रक को रोका तो उसके अंदर गिट्टी और खाद भरी थी, लेकिन नीचे खैर की मोटी-मोटी बल्लियां छिपी हुई थीं। वन्यजीव विशेषज्ञ जीतेंद्र के अनुसार खैर की अंधाधुंध कटान से जंगल का संतुलन बिगड़ गया है। शनिवार को रेंजर व 18 अन्य के विरुद्ध गैंगस्टर की कार्रवाई के बाद पुलिस ने कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है।
लखनऊ से संचालित हो रहा था तस्करी का नेटवर्क
पुलिस की जांच में सामने आया कि लकड़ी तस्करी गैंग का सरगना अनूप शुक्ला तुलसीपुर का रहने वाला है। गिरोह का संचालन लखनऊ से होता था। लखनऊ निवासी प्रीतमपाल सिंह को अनूप ने गिरोह में शामिल कर रखा था। पुलिस के अनुसार उसके घर पर ही सौदा तय होता था। गाड़ियों की रवानगी का समय भी वहीं तय होता था। इसमें लखनऊ के भी कुछ ट्रांसपोर्टर शामिल हैं। अब पुलिस ऐसे ट्रांसपोर्टरों की सूची बना रही है, जिनके माध्यम से खैर की लकड़ी पंजाब-हरियाणा तक भेजी जाती थी। रेंजर के साथ अनूप शुक्ला और उसके साथियों पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट लगाया है। अब उनकी करोड़ों की अवैध संपत्तियों की कुर्की की तैयारी चल रही है। लखनऊ और गोंडा में उनके नाम पर खरीदे गए प्लॉट, मकान और गोदामों की सूची प्रशासन ने तैयार चल रही है।
विज्ञापन

रेंजर गिरोह को रखता था सुरक्षित
वन विभाग का रेंजर राकेश पाठक गिरोह को सुरक्षा कवच प्रदान करता था। आरोप है कि वह गश्त के समय और रूट की जानकारी माफिया को पहले ही दे देता था। कई बार तो विभागीय कागजों में अवैध लकड़ी को वैध दिखाने का खेल भी इसी की मदद से हुआ। पुलिस ने अब उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की तैयारी की है। गिरोह ने खैर की लकड़ी छुपाने के लिए गांवों के किनारे गुप्त गोदाम बना रखे थे। पुलिस की कार्रवाई में कटहरी, हरैया और रेहरा क्षेत्र में कई जगहों से बड़ी मात्रा में लकड़ी बरामद हुई है।
विज्ञापन

गिरोह का खेल
-जंगल में खैर के पेड़ की जड़ों में पहले आरी चलाते थे।
-कुछ दिन बाद पेड़ गिरता तो लकड़ी उठाकर खेतों और नालों में छिपा देते।
-ट्रकों में ऊपर खाद-गिट्टी भरकर नीचे लकड़ी भेजते।
-सौदेबाजी और ट्रांसपोर्ट का संचालन लखनऊ से।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें