अपने साथी के घर के अंदर जले पत्रकार राकेश सिंह निर्भीक सोशल मीडिया पर बेबाक टिप्पणी व स्पष्टवादिता के लिए मशहूर थे। वह किसी बात को स्पष्ट हर प्लेटफार्म पर पूरी तरह से निर्भीक होकर टिप्पणी करते थे। इन्हीं सब कारणों से वह अक्सर विवाद व चर्चा में भी रहते थे। मिलनसार व सरल स्वभाव के इस व्यक्ति की पोस्ट अक्सर देर रात में सोशल मीडिया पर भी वायरल होती थी। वह लखनऊ से प्रकाशित एक हिंदी दैनिक के जिला संवाददाता भी थे। बीते दिनों जनप्रतिनिधियों और पार्टी पदाधिकारियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी की वजह से उनके खिलाफ आईटी एक्ट के तहत मुकदमा भी दर्ज हुआ था।
इसी मामले में पुलिस ने उन्हें जेल भी भेजा था। विधायक हो या सांसद वह किसी को भी नहीं बख्शते थे। बीते दिनों उसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल किया था। जिसमें एक दलित परिवार दबंगों से परेशान होकर गांव से पलायन कर रहा था। इसी मुद्दे पर राकेश ने लोगों से आगे आकर पीड़ित परिवार के मदद की भी अपील की थी।
हालांकि इस मामले को पुलिस ने दोनों पक्षों का शांति भंग में चालान कर मामला रफादफा करा दिया था। उनकी मौत से पत्नी विभा सिंह और दो मासूम बेटियां अनाथ हो गई हैं। राकेश ने कई बार शासन व प्रशासन के खिलाफ आंदोलन भी किया था। उनका आंदोलन काफी चर्चित रहा। तमाम लोगों ने राकेश की स्पष्टवादिता स्वीकार भी कर ली थी और कहते थे कि राकेश नहीं सुधरेंगे। वह हर मुद्दे पर मीडिया के वरिष्ठ साथियों से राय-मशविरा भी करते थे।
हत्या व घटना की गुत्थी में उलझी पुलिस
पत्रकार राकेश सिंह निर्भीक के साथ हुए हादसे को लेकर पुलिस भी चकरघिन्नी हो गई है। शनिवार दोपहर तक पुलिस इस पसोपेश में पड़ी हुई थी कि कमरे में आग कैसे लगी। कमरे के बाहर का ताला किसने बंद किया। दीवार टूटने के पहले कोई विस्फोट हुआ कि नहीं। इन्हीं सब सवालों के जवाब ढूंढने में पुलिस का पसीना छूट रहा है। देर शाम तक पुलिस इस गुत्थी को सुलझा नहीं पाई थी।
कमिश्नर व डीआईजी ने किया दौरा
शनिवार शाम देवीपाटन मंडल के कमिश्नर एसबीएस रंगाराव और डीआईजी डॉ. राकेश सिंह भी कलवारी गांव स्थित मृतक पत्रकार राकेश सिंह निर्भीक के घर पहुंचे। इन लोगों ने मृतक के पिता व पत्नी से बातचीत की और मातहतों को शीघ्र घटना के खुलासे का आदेश दिया। दोनों अधिकारियों ने परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया है।