जरवा। सीमावर्ती क्षेत्र जरवा में अब व्यापार के रास्ते खुलने वाले हैं। कस्टम चौकी जरवा को नया भवन और आवास के बाद अब चौकी को डिजिटल कर दिया गया है। चौकी प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार ने बताया कि भंसार शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। विभागीय आदेश का इंतजार है। आदेश मिलते ही व्यापारी आईसी कोड के माध्यम से आयात-निर्यात शुरू कर सकेंगे।
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भारत-नेपाल सीमा जरवा पर व्यापार की नई उम्मीद जगी है। मुख्य सड़क से सटे नया कस्टम चेक पोस्ट भी बन रहा है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों में आसानी होगी। कस्टम चौकी प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार ने बताया कि भंसार की सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। अब मैन पावर की तैनाती की प्रतीक्षा है। अनुमति मिलते ही इस मार्ग से आयात-निर्यात शुरू कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जिन व्यापारियों के पास आयात-निर्यात (आईसी) कोड होगा, वे सीधे यहां से व्यापार कर सकेंगे। व्यापारियों को जागरूक करने के लिए जल्द ही शिविर लगाया जाएगा, जिसमें भारत और नेपाल के व्यापारी शामिल होंगे। जरवा कस्टम चौकी के विस्तार और डिजिटल प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्थानीय लोगों में उत्साह है। व्यापारियों का कहना है कि यदि पीली प्लेट टैक्सियों पर लगी रोक हटाई जाए और चौकी पर मैन पावर की तैनाती जल्द हो, तो जरवा सीमा व्यापार और रोजगार का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
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सीमा पर अड़चन : पीली प्लेट टैक्सी पर रोक से परेशानी
नेपाल के कोयलाबास गांव पालिका के प्रधान खालिद ने बताया कि सीमा पर काफी बंदिशें हैं। छांगुर कांड के बाद से भारत सीमा पर तैनात एसएसबी जवान पीली नंबर प्लेट टैक्सी गाड़ियों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं। इससे नेपालियों को लगभग 160 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। मजदूरी कर भारत लौटने वाले नेपाली नागरिक अपने परिवार और सामान के साथ आते हैं, लेकिन सीमा पर गाड़ी रोक दी जाती है। कृष्णानगर-बढ़नी सीमा पर इन्हीं गाड़ियों को प्रवेश की अनुमति मिल जाती है। जरवा निवासी मुस्तकीम कहते हैं कि टैक्सी वाहनों पर रोक का असर कस्टम चौकी पर भी पड़ रहा है। एएम ट्रेवल्स के चालक मनोज वर्मा ने बताया कि वह जयपुर से लौट रहे नेपालियों को कोयलाबास सीमा तक ले जा रहे थे, लेकिन गाड़ी रोक दी गई। मजबूरी में उन्हें अतिरिक्त सफर कर कृष्णानगर-बढ़नी सीमा से होकर जाना पड़ा।