बलरामपुर। भारत-नेपाल दोहरी नागरिकता प्रकरण में पुलिस ने अभिलेखों की जांच पूरी कर ली है। अब जरवा पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है। स्थानीय लोगों से संपर्क बढ़ाने के साथ संभावित ठिकानों पर भी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि आरोपियों से पूछताछ के बाद ही पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी। उधर, खुफिया एजेंसियों ने भी अपनी रिपोर्ट तैयार कर उच्च स्तर पर भेज दी है।
सूत्रों के अनुसार, तीन जुलाई को जरवा कोतवाली में दर्ज एफआईआर के बाद पुलिस ने राजस्व, निर्वाचन, पूर्ति, पंचायत, पासपोर्ट समेत विभिन्न विभागों से प्राप्त अभिलेखों का गहन मिलान किया। आवेदन पत्रों, सत्यापन रिपोर्टों, संस्तुतियों और विभागीय रिकॉर्ड का आपस में मिलान कर कई महत्वपूर्ण तथ्य जुटाए गए हैं।
जांच में अब केवल फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वालों की ही नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की भूमिका खंगाली जा रही है। विवेचना के दौरान ऐसे लोगों की भी पहचान की गई है, जिन्होंने आवेदन तैयार कराने, सत्यापन कराने या परिचयकर्ता की भूमिका निभाई थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि दस्तावेजों की यह श्रृंखला पूरे प्रकरण का सबसे अहम साक्ष्य है। इसी आधार पर जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर विवेचना का दायरा बढ़ाकर अन्य संदिग्धों को भी शामिल किया जा सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में बड़ी संख्या में नेपाली नागरिकों के मतदाता सूची में शामिल होने के पीछे राजनीतिक संरक्षण की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं की गई है।
पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि मामले की हर स्तर पर जांच की गई है। अब पुलिस टीमें जांच के अगले चरण में काम कर रही हैं और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।