बलरामपुर। भारत-नेपाल सीमा से जुड़े नेपाली नागरिकों को भारतीय पहचान दिलाने के मामले की जांच अब रफ्तार पकड़ रही है। इस मामले में 27 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों ने विवेचना का दायरा सीमा पार तक बढ़ा दिया है। अब नेपाल के डांग जिले के अभिलेखों, विशेष रूप से मतदाता सूची और स्थानीय रिकॉर्ड का मिलान हो रहा है। इसके लिए पुलिस विभाग की एक विशेषज्ञ टीम लगाई गई है। जो आनलाइन डाटा सर्च कर रही है। एसपी विकास कुमार ने दावा किया कि जल्द पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।
जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि यदि संबंधित लोग नेपाल की मतदाता सूची में भी दर्ज मिलते हैं तो यह दोहरी पहचान और फर्जी दस्तावेजों के पूरे नेटवर्क की अहम कड़ी साबित होगी। इसी कारण सीमा पार उपलब्ध अभिलेखों और स्थानीय स्तर पर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। विवेचना में अब पूर्व सांसद रिजवान जहीर के नेपाल में संभावित संपर्कों और प्रभाव की भी पड़ताल की जा रही है।जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि क्या नेपाल में उनके राजनीतिक, सामाजिक या अन्य स्तर के ऐसे संपर्क थे, जिनका इस्तेमाल नेपाली नागरिकों को भारतीय पहचान दिलाने की प्रक्रिया में किया गया।
इस बात का पता भी लगाया जा रहा है कि भारतीय नागरिकता संबंधी दस्तावेज तैयार कराने, मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने और स्थानीय स्तर पर पहचान स्थापित कराने में किसी राजनीतिक संरक्षण या प्रभाव का इस्तेमाल तो नहीं हुआ। ताकि नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों को बेनकाब किया जा सके। पुलिस उन सभी का विवरण खंगाल रही है, जिन्होंने किसी भी स्तर पर आरोपियों की मदद की। आरोपियों तक पहुंचने के लिए उनके रिश्तेदारों, परिचितों और स्थानीय मददगारों के जरिए भी जानकारी जुटाई जा रही है।
खंगाला जा रहा तीन दशक का पूरा रिकॉर्ड
विवेचना का सबसे अहम हिस्सा पिछले लगभग 30 वर्षों में तैयार हुए सरकारी अभिलेखों की पड़ताल होगी। जांच एजेंसियां यह पता लगाएंगी कि सबसे पहले मतदाता सूची में नाम किस आधार पर दर्ज हुआ, निवास प्रमाणपत्र किस अधिकारी ने जारी किया, आधार कार्ड के लिए कौन-कौन से दस्तावेज लगाए गए और विभिन्न स्तरों पर सत्यापन किसने किया। यदि जांच में किसी सरकारी कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, सत्यापन अधिकारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी बेचैनी
पूरे मामले में पूर्व सांसद का नाम जांच के दायरे में आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी बेचैनी बढ़ने लगी है। चर्चा है कि यदि जांच में प्रभावशाली लोगों की भूमिका सामने आती है तो मामला केवल फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक संरक्षण और संगठित नेटवर्क की दिशा में भी बढ़ सकता है। इसके चलते ही आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और अहम खुलासे हो सकते हैं।