बलरामपुर। जनपद के राजस्व न्यायालयों में कोविड 19 के कारण काम बाधित होने से मुकदमों का बोझ बढ़ता जा रहा है। कोविड 19 के दौरान लगभग तीन हजार मुकदमों की बढ़ोत्तरी हुई है। राजस्व न्यायालयों में लगभग 34 हजार मुकदमे लंबित है। कोविड 19 के दौरान जहां लगभग 4200 मुकदमे पंजीकृत हुए लेकिन न्यायालय में कार्य बाधित होने के कारण मात्र 1200 मुकदमों का ही निस्तारण हो सका है।
जनपद में जिला मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट, अपर जिला मजिस्ट्रेट न्यायिक, अपर एसडीएम, तीनों तहसीलों में एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदार न्यायालय सहित 17 राजस्व न्यायालय संचालित है।
इन न्यायालयों में लगभग 34 हजार मुकदमे लंबित है। कोविड 19 के तहत माह 2020 से राजस्व न्यायालयों में न्यायिक कार्य लगभग छह महीने बाधित रहा था।
कोविड 19 के पहली लहर में कमी आने पर राजस्व न्यायालयों में कार्य शुरू हुआ लेकिन कोविड 19 की दूसरी लहर को देखते हुए 30 अप्रैल से न्यायिक कार्य बाधित हो गया। राजस्व न्यायालयों में न्यायिक कार्य बाधित होने से भूमि संबंधी विवादों का निस्तारण समय से नहीं हो पा रहा है जिससे वादकारियों को समय से न्याय मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों पर प्रशासनिक कार्यों का बोझ रहता है। डीएम, एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदार के राजस्व न्यायालयों का कार्य प्रशासनिक कार्यों के बढ़ते बोझ के चलते बाधित रहता है। प्रशासनिक अधिकारियों को प्रशासनिक कार्यों के साथ राजस्व न्यायालयों में भी मुकदमों की सुनवाई करनी होती है जिससे राजस्व न्यायालयों में मुकदमों का बोझ बढ़ता रहता है।
जनपद में बैनामा कार्य कोविड 19 की दूसरी लहर के दौरान जारी रहा लेकिन इस दौरान बैनामा के बाद विवादित पत्रावलियों की निस्तारण न होने से क्रेता के नाम पर भूमि का स्थानांतरण खतौनी में नहीं हो सका। इस दौरान अविवादित बैनामे की भूमि का हस्तानांतरण खतौनी में राजस्व अधिकारियों द्वारा किया जाता रहा है।