बलरामपुर। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ने परीक्षा प्रणाली में सुधार की कवायद शुरू की है। इसके तहत सत्र 2025-26 की द्वितीय सेमेस्टर परीक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब को-करिकुलर विषयों की परीक्षा दो घंटे की होगी, जिसमें विद्यार्थियों को सौ बहु विकल्पीय प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। विश्वविद्यालय का मानना है कि नई व्यवस्था से छात्रों की विषयगत समझ, तार्किक क्षमता और पाठ्यक्रम पर पकड़ का अधिक निष्पक्ष एवं वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन संभव हो सकेगा।
यह निर्णय कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित परीक्षा समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में आगामी परीक्षाओं की रूपरेखा, मूल्यांकन प्रक्रिया, शोध कार्यों और परीक्षा अनुशासन से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति ने द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा योजना को मंजूरी देते हुए परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया।
बैठक में प्रायोगिक परीक्षाओं में अंक देने की प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। प्रैक्टिकल परीक्षाओं में असामान्य रूप से अधिक अंक दिए जाने की स्थिति में संबंधित महाविद्यालयों को उसका प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। स्नातक एवं परास्नातक पाठ्यक्रमों में 85 प्रतिशत तथा बीएड पाठ्यक्रम में 90 प्रतिशत से अधिक अंक दिए जाने पर विशेष निगरानी होगी। बैठक में प्रथम सेमेस्टर के मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक समयबद्ध एवं त्रुटिरहित बनाने पर जोर दिया गया।
शोधार्थियों का होगा सिनॉप्सिस प्रजेंटेशन
शोध कार्यों को गति देने के उद्देश्य से जून के इस सप्ताह से शोधार्थियों के सिनॉप्सिस प्रेजेंटेशन शुरू होगा। जिससे शोध प्रवेश और पंजीकरण की प्रक्रिया में तेजी आएगी। कुलपति ने बताया कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद छात्रों के प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित होगा और परीक्षा प्रक्रिया में विश्वास भी मजबूत होगा।
त्रिस्तरीय समिति का गठन
शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कृषि संकाय के पाठ्यक्रम एवं परीक्षा पैटर्न की समीक्षा हेतु त्रिस्तरीय समिति गठित की गई है। यह समिति वर्तमान पाठ्यक्रमों को रोजगारपरक और नई शिक्षा नीति के अनुरूप बनाने के लिए आवश्यक बदलावों का प्रस्ताव भी तैयार करेगी।