बलरामपुर। सदर तहसील के टेंगनहिया गांव में राप्ती नदी का कटान गांव के लिए गंभीर समस्या बन चुका है। बाढ़ के समय गांव के पक्के और कच्चे मकानों के साथ-साथ कृषि योग्य भूमि और बगीचों का भी कटान हो रहा है। जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल रहता है। यदि बरसात से पहले कटानरोधी कार्य शुरू नहीं हुआ तो आने वाले समय में गांव के कई घर और खेत राप्ती नदी की लहरों में बह सकते हैं। इस स्थिति में ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
गांव के लोग बताते हैं कि राप्ती नदी ने अब तक 100 बीघा कृषि योग्य भूमि और बगीचों को अपने आगोश में ले लिया है। अब तक 30 से ज्यादा घर नदी के कटान के मुहाने पर हैं। गांव का मदरसा और मस्जिद भी कटान के क्षेत्र में आ गए हैं। एक बीघे में 90 क्विंटल गन्ने का उत्पादन होता है, लेकिन नदी के कटान से खेतों में लगे गन्ने को भी नुकसान पहुंच चुका है।
पिछले साल 26 अगस्त से 1 सितंबर तक बाढ़ खंड द्वारा कुछ कटानरोधी कार्य किए गए थे, जिसमें सिर्फ नौ बंबू कैरट और बोरियों में मिट्टी भरकर डाला गया था, जो कोई खास असर नहीं डाल सका। इसके बाद एक्सईएन बाढ़ खंड ने आश्वासन दिया था कि बरसात खत्म होने के बाद राप्ती नदी की धारा को मोड़ने के लिए ड्रेजिंग कार्य शुरू किया जाएगा। लेकिन यह कार्य अब तक शुरू नहीं हुआ है। जिससे ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।
ग्रामीणों की शिकायतों पर नहीं हो रही कार्रवाई
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री पोर्टल और संपूर्ण समाधान दिवस पर कई बार प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वे आश्वस्त नहीं हैं कि आगामी समय में नदी के कटान को रोकने के लिए जिम्मेदार विभाग कोई कदम उठाएगा या नहीं।
कटान से फसलें तबाह, मुआवजे की मांग
ग्रामीण सलीम, ननकऊ, अफजाल, भूरे, चिनाऊ और पटवारी बताते हैं कि राप्ती नदी ने उनके खेतों में लगी फसलों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है, लेकिन अब तक उन्हें गन्ना और अन्य फसलों के नुकसान का कोई मुआवजा नहीं मिला है। यदि जल्दी ही कटानरोधी कार्य नहीं शुरू हुआ, तो राप्ती नदी के कटान से गांव के 40 से अधिक परिवार बेघर हो सकते हैं।