बलरामपुर। हाईब्रिड धान बेच पाना किसानों के लिए इस बार टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। दरअसल, हाईब्रिड धान बेचने वाले किसानों से हाईब्रिड बीज की रसीद व कैशमेमो सबूत के रूप में मांगी जा रही है। किसान ऑनलाइन पंजीकरण कराने के बाद भी सरकारी क्रय केंद्रों पर अपना हाईब्रिड धान नहीं बेच पा रहे हैं। ऐसे में किसान आढ़तियों को अपनी उपज बेचने को विवश हैं।
जिले में एक नवंबर से धान खरीद चल रही है। धान खरीदने के लिए चार क्रय एजेंसियों ने 28 केंद्र स्थापित किए हैं। चारों क्रय एजेंसियों को इस बार 30 हजार मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य दिया गया है। 14 नवंबर तक 249 किसानों से 348.03 मीट्रिक टन खरीदा जा चुका है। वहीं इस बार हाईब्रिड धान बोने वाले किसानों की समस्या बढ़ गई है। सरकारी क्रय केंद्रों पर हाईब्रिड धान बेचने आने वाले किसानों से बीज की रसीद मांगी जा रही है। बीज का रसीद न देने वाले किसानों का हाईब्रिड धान नहीं खरीदा जा रहा है।
खरीद नीति में हाईब्रिड धान बेचने के लिए बीज रसीद का रिकाॅर्ड जमा करना अनिवार्य किए जाने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। बीज खरीद का रिकाॅर्ड नहीं होने से किसान हाईब्रिड धान आढ़तियों को औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। भगवतीगंज मंडी समिति में बने क्रय केंद्र पर किसान परेशान होकर लौट रहे हैं।
नियम को लिया जाए वापस
किसान नेता बृजेश विश्वकर्मा ने बताया कि यदि किसी किसान ने बीज खरीदते समय बिल लिया भी होगा तो भी चार-पांच माह बाद बिल को सुरक्षित रखना उनके लिए मुश्किल है। यदि किसानों को पहले पता होता कि हाईब्रिड धान बिक्री के समय बिल की जरूरत पड़ेगी तो शायद बिल रखते भी। रामसनेही साहू ने कहा कि धान बेचने के लिए बीज रसीद देना पाना बहुत मुश्किल है। शासन को इस नियम में बदलाव करना होगा, नहीं तो जिले के तमाम किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना का लाभ पाने से वंचित रह जाएंगे।
बीज खरीद का प्रमाण अनिवार्य
खरीद नीति के अनुसार हाईब्रिड धान बेचने के लिए किसानों को बीज खरीद का प्रमाण केंद्र पर लाना अनिवार्य है। बीज खरीद रिकाॅर्ड में रसीद, कैश मेमो को शामिल किया गया है। उन्होंने किसानों से पंजीकरण के बाद हाईब्रिड धान होने पर रिकाॅर्ड लाने की अपील की है। - निश्चल आनंद, डिप्टी आरएमओ