बलरामपुर के मदरसा दारुल उलूम इमाम-ए-आजम लिलबनात में फातिहा पढ़ते उलेमा।
बलरामपुर। नगर स्थित मदरसा दारुल उलूम इमाम-ए-आजम लिलबनात में हुजूर ताजुश्शरिया का पांचवा सालाना उर्स अकीदत के साथ मनाया गया। उलेमाओं ने हुजूर ताजुश्शरिया के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया। इस दौरान फातिहा पढ़कर मुल्क में अमम-चैन की दुआ भी मांगी गई।
उर्स में शनिवार रात पहुंचे शहर मुफ्ती मौलाना मसीह अहमद कादरी ने हुजूर ताजुश्शरिया के जीवनवृत्त पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इनकी शिक्षा काहिरा मिस्र स्थित अल अजहर विश्वविद्यालय में हुई। पढ़ाई के दौरान विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान आने पर मिस्र के राष्ट्रपति कर्नल अब्दुल नासिर ने उन्हें फक्रे अजहर अवार्ड दिया था। तभी से उनके नाम के आगे अजहरी लिखा जाता है। वह दीन के बहुत बड़े जानकार थे। उन्हें कई भाषाओं का ज्ञान था और कई भाषाओं में उन्होंने दीन से जुड़ी किताबें भी लिखीं।
मौलाना मोहम्मद उमर ने कहा कि उनका नाम अल्लामा अख्तर रजा खां है। हदीस के बड़े जानकार होने के कारण उन्हें ताजुश्शरिया के नाम से जाना जाता है। इन्हीं खूबियों के चलते उन्हें मानने वाले लोग आज के दिन उनका सालाना उर्स मनाते हैं। मौलाना कासिम अख्तर ने कहा कि उन्होंने लोगों को शिक्षित बनने का संदेश दिया। उर्स की शुरुआत कुरान-ए-पाक की तिलावत के साथ कारी इकरार अहमद ने की। इसके बाद शायरे इस्लाम जाहिद बलरामपुरी व चांद रजा ने नातिया कलाम पढा। अंत में शहर मुफ्ती ने मुल्क में अमन-चैन और आपसी भाईचारा कायम रखने के लिए दुआ मांगी।