बलरामपुर। कार्यकाल के बाकी बचे 12 दिनों में जिले के ग्राम प्रधानों के समक्ष 8.54 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च करने की चुनौती है। चालू वित्तीय वर्ष में जिले के 800 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों पर 83.50 करोड़ रुपये विभिन्न मदों से खर्च किये जा चुके हैं।
जिले के सभी 800 ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों पर खर्च करने के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 92 करोड़ रुपये मिले थे। ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 24 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। पैसा खर्च करने में जिले के ग्राम प्रधान जुटे हुए हैं।
वर्ष 2015 में चुने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 24 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। मौजूदा ग्राम प्रधानों को उनके कार्यकाल के सिर्फ 12 दिन शेष रहे गए हैं। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा समय में ग्राम पंचायतों में विभिन्न योजनाओं का आठ करोड़ 53 लाख 44 हजार रुपये ग्राम प्रधानों के कार्यकाल का धन बचा है।
पंचायती राज विभाग के डीपीएम संदीप कश्यप ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2019-20 के 14वां वित्त आयोग से 28 करोड़ 78 लाख 53 हजार रुपये खर्च न होने पर बची शेष धनराशि एक अप्रैल 2020 को ग्राम पंचायतों में विभिन्न विकास कार्यों के लिए ट्रांसफर कर दी गई थी।
इसके अतिरिक्त वित्तीय वर्ष 2020-21 में 15वां वित्त आयोग से 44 करोड़ 48 लाख 39 हजार रुपये शासन से दिया गया। कोविड-19 महामारी के दौरान गरीब कल्याण रोजगार अभियान योजना के तहत जिले के 800 ग्राम पंचायतों में घर आए 90 हजार प्रवासी श्रमिकों को रोजगार दिलाने के लिए 15वां वित्त आयोग की धनराशि खर्च की गई।
धनराशि से जिले के 800 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण, 528 ग्राम पंचायतों में सचिवालय भवन निर्माण, हैंडपंपों की मरम्मत, तीन प्रतिशत आपदा निधि और गोवंश आश्रय स्थलों के निर्माण पर खर्च की गई। वित्तीय वर्ष 2019-20 में राज्य वित्त से 10 करोड़ 16 लाख 52 हजार रुपये खर्च न होने के चलते सभी ग्राम पंचायतों को वित्तीय वर्ष 2020-21 में मिली।
शासन ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में राज्य वित्त आयोग से आठ करोड़ 58 लाख रुपये की धनराशि आवंटित किया। इन सभी धनराशि से सामुदायिक शौचालय निर्माण, पंचायत घर निर्माण, हैंडपंपों की मरम्मत, 14 पैरामीटर पर स्कूलों के कायाकल्प, सामुदायिक शौचालय निर्माण, प्रधानों के मानदेय व कोरोना आपातकाल पर खर्च किया गया है।
जिले में 92 करोड़ दो लाख 44 हजार की तुलना में 83 करोड़ 49 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। आठ करोड़ 53 लाख 44 हजार रुपये बचे हैं जो 24 दिसंबर तक मौजूदा कार्यकाल में ग्राम प्रधान खर्च कर सकेंगे। कार्यकाल समाप्त होने के बाद शासन के अग्रिम दिशा-निर्देश के बिना कोई भी ग्राम प्रधान धनराशि खर्च नहीं कर सकेगा।
पहले से बरती जा रही सख्ती
जिले के सभी 800 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार ही बजट खर्च करने का निर्देश दिया गया है। शासन स्तर से निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार ही बजट खर्च करने को लेकर पहले से सख्ती बरती जा रही है। बिना कार्ययोजना के बजट खर्च करने वाले प्रधानों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
- नीलेश प्रताप सिंह, डीपीआरओ