बलरामपुर। गैड़ास बुजुर्ग थाने के सामने आत्मदाह करने वाले दलित राम बुझारत के परिवार को दो साल बाद उम्मीद की किरण नजर आई है। आरोपी दरोगा पवन कनौजिया के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब प्रकरण की सुनवाई अदालत में शुरू होगी। हाईकोर्ट के सख्त रुख और शासन की मंजूरी के बाद हुई इस कार्रवाई ने परिवार को न्याय की उम्मीद दी है।
23 अक्तूबर 2023 को थाने के सामने आत्मदाह करने वाले राम बुझारत की मौत के बाद से ही परिजन न्याय के लिए दर-दर भटक रहे थे। जांच से लेकर कार्रवाई तक कई बार मामला ठंडे बस्ते में चला गया। परिजनों का कहना है कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि कभी आरोपी पर चार्जशीट दाखिल हो पाएगी। अब जब अपर पुलिस अधीक्षक राधेश्याम राय की विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, तो परिवार को विश्वास है कि अब दोषी को सजा मिलेगी। मृतक की पत्नी कुसुमा देवी ने कहा कि मेरे पति को बेवजह प्रताड़ित किया गया था। हम गरीब लोग हैं, मगर अब भगवान और अदालत से न्याय की आस है। अगर दोषी को सजा मिलती है तो हमारे जैसे लोगों को भी हिम्मत मिलेगी।
एक व्यक्ति की नहीं, व्यवस्था की लड़ाई
राम बुझारत प्रकरण ने उस वक्त पूरे जिले में प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए थे। मृतक की जमीन पर पुलिस की भूमिका की पुष्टि होने के बाद शासन को दरोगा के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ी थी। अब जबकि मामला अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है, जिलेभर में यह चर्चा है कि क्या आखिरकार राम बुझारत को न्याय मिलेगा। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता शिवनाथ गौतम का कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, व्यवस्था की लड़ाई है। अगर इस मामले में सख्त कार्रवाई होती है तो यह कई कमजोर लोगों के लिए मिसाल बनेगा।