बलरामपुर। क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने तेंदुआ को पकड़ने के लिए अब लखनऊ चिड़ियाघर से मदद मांगी गई है। इसके तहत चिड़ियाघर प्रशासन मादा तेंदुए का मूत्र वन विभाग की टीम को उपलब्ध कराएगा। इस मूत्र का छिड़काव तेंदुआ पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजड़ों के आसपास किया जाएगा ताकि उसकी गंध से तेंदुए को पकड़ा जा सके।
एक माह के दौरान इलाके में मौजूद तेंदुआ अब तक पांच बच्चों को अपना शिकार बना चुका है। बीते दिनों ही वन विभाग ने स्वीकारा था कि क्षेत्र में एक नहीं वरन दो तेंदुए सक्रिय हो कर आतंक फैला रहे हैं। इन्हें पकड़ने के लिए लगाए गए दस पिंजड़े और 15 ट्रैकिंग कैमरे भी कारगार साबित नहीं हो पाए है। इसके चलते ही वन विभाग के विशेषज्ञों की टीम ने तेंदुआ पकड़ने के लिए अब नए तौर तरीके अपनाने की कवायद शुरू की है।
धरपकड़ के लिए बनी वन विभाग की टीम में शामिल विशेषज्ञों के अनुसार अब यह तय हो चुका है कि इलाके में सक्रिय दोनों तेंदुए नर हैं। इस लिए उन्हें पकड़ने के लिए पिंजड़े के पास तक लाने के लिए अब मादा तेंदुआ की गंध का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए लखनऊ चिड़ियाघर से मादा का मूत्र लेकर उसका छिड़काव किया जाएगा।
दूसरी तरफ मुख्य संरक्षक वन्य जीव बोनिक चंद्र ब्रह्मा ने भी तेंदुआ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर इसे पकड़ने के कराए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी प्राप्त की। डीएफओ को निर्देश दिया कि तेंदुआ अब कोई नुकसान न पहुंचा पाए, इसके लिए विशेष सतर्कता बरती जाए। डीएफओ एम.सेम्मारन ने बताया कि आदमखोर बन चुके तेंदुआ को पकड़ने के लिए विशेषज्ञों की राय के आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है।