बलरामपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर अब तक आधी आबादी का ही कब्जा रहा है। आने वाले समय में भी आधी आबादी के कब्जे में जिला पंचायत के अध्यक्ष पद की कमान रहेगी। जिला बनने से लेकर अब तक लगातार महिलाओं के हक में जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट जाती रही है।
इस बार के चुनाव में भी महिला सीट के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण किया गया है। 22 मई 1997 को बलरामपुर जिला गोंडा से अलग हुआ। बलरामपुर जिले के हिस्से में तीन तहसीलें व नौ ब्लॉक आए। छह महीने तक जिला पंचायत अध्यक्ष का कार्यभार गोंडा जिला पंचायत की अध्यक्ष डॉ. सीमा पांडेय ने देखा।
वर्ष 1998 में अध्यक्ष पद के लिए पहला सीधा चुनाव हुआ। पहले चुनाव में शासन ने यह सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित की। चुनाव के बाद सोनपती देवी अध्यक्ष बनी। वर्ष 2001 में शासन ने अध्यक्ष पद सामान्य महिला के कोटे में आरक्षित कर दिया। इस बार इस सीट पर पूर्व सांसद स्व. सत्यदेव सिंह की पत्नी स्व. सरोज रानी अध्यक्ष बनीं।
वर्ष 2005 में यह सीट अनारक्षित कर दी गई। इस बार इस सीट पर पूर्व सांसद रिजवान जहीर की पत्नी हुमा रिजवान ने परचम लहराया। वर्ष 2010 में यह सीट फिर सामान्य महिला के लिए आरक्षित कर दी गई। राजनीतिक समीकरण के चलते अध्यक्ष पद पर दूसरी बार हुमा रिजवान निर्विरोध चुन ली गई।
वर्ष 2015 में शासन ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद को अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित कर दिया। इस सीट पर सपा समर्थित प्रत्याशी रामावती ने कब्जा जमाया। 2021 में पहले शासन ने बलरामपुर जिला पंचायत अध्यक्ष सीट अनारक्षित घोषित की थी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन स्तर से जारी आरक्षण सूची में इस बार फिर से बलरामपुर जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष पद को सामान्य महिला के लिए आरक्षित किया गया है। सामान्य महिला के सीट पर जिला पंचायत अध्यक्ष पद का आरक्षण होने से इस बार भी आधी आबादी का ही कब्जा रहेगा। (संवाद)