गोंडा। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिल को पास करने के बदले पांच हजार रुपये रिश्वत लेते हुए पकड़े गए बाबू शशिकांत सिंह की विभागीय पड़ताल शुरू हो गई है। सीएमओ डॉ. संत प्रताप पटेल के निर्देश पर जिला स्वास्थ्य शिक्षा सूचना अधिकारी ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति की लंबित फाइलों की पड़ताल की।
जांच में पता चला कि जिस लिपिक के पास इसका प्रभार था, उसे सिर्फ अभिलेखों के सत्यापन तक ही सीमित रखा गया था। जबकि बिल पास कराकर टोकन जारी करने की जिम्मेदारी बाबू शशिकांत सिंह के पास थी। यहीं से सारा खेल होता था। इससे पहले भी डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी चिकित्सा प्रतिपूर्ति को लेकर सवाल उठा चुके हैं।
शुक्रवार को सेवानिवृत्त स्वास्थ्य कर्मी आरपी मिश्र अपने चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिल के बारे में जानकारी करने पहुंचे। 16 अक्तूबर को स्वीकृत होने के बाद भी उन्हें अभी तक लाभ नहीं मिल सका है। उन्होंने कार्रवाई की मांग की।