गोंडा। वर्ष 2023 में 16 मई को पुलिस हिरासत में अधिवक्ता राजकुमार लाल श्रीवास्तव की हुई मौत के मामले में न्यायिक जांच शुरू हो गई है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने इस मामले में वादी पवन श्रीवास्तव को 20 दिसंबर को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है।
जमीन घोटाले के एक मामले में गायत्रीपुरम निवासी अधिवक्ता राजकुमार लाल श्रीवास्तव को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस अभिरक्षा के दौरान ही अधिवक्ता की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद अधिवक्ताओं ने जोरदार आंदोलन किया था। मृतक अधिवक्ता के भाई पवन कुमार श्रीवास्तव की तहरीर पर इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके साथ ही इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग भी की गई थी। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम ने अब वादी पवन कुमार श्रीवास्तव निवासी गायत्रीपुरम, थाना कोतवाली नगर को न्यायिक जांच के लिए अपना बयान दर्ज कराने हेतु 20 दिसंबर को उपस्थित होने के लिए तलब किया है।
आज होगा मुकदमों का निस्तारण
गोंडा। दीवानी न्यायालय परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। अपर जिला जज दानिश हसनैन ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन प्रशासनिक न्यायमूर्ति डॉ गौतम चौधरी करेंगे। इसमें निर्धारित मुकदमों का निस्तारण किया जाएगा।
24 को होगी निगरानी वाद की सुनवाई
गोंडा। एमपीएमएलए विशेष न्यायालय के न्यायाधीश अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय राजेश कुमार ने विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के निगरानी वाद की सुनवाई अब 24 दिसंबर नियत की है। निगरानी वाद शुक्रवार को निगरानीकर्ता के अधिवक्ता की ओर से मौका प्रार्थना पत्र दिया गया। इस पर न्यायालय ने यह आदेश जारी किया।
निलंबित बीएसए अतुल तिवारी की याचिका खारिज
गाेंडा। निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल कुमार तिवारी की निलंबन रद्द करने की मांग वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि अतुल कुमार तिवारी को दो सप्ताह के भीतर सरकार और जांच कमेटी के माध्यम से आरोप पत्र दिया जाए। दरअसल, फर्नीचर खरीद में घूस लेने के आरोप में सरकार ने अतुल तिवारी को निलंबित कर दिया था।
निलंबित बीएसए ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में यह दलील दी थी कि वह वास्तव में फर्नीचर की खरीद के उद्देश्य से गठित समिति के सदस्य मात्र थे और निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल एकमात्र व्यक्ति नहीं थे। उन्होंने कई अन्य तथ्य भी न्यायालय के समक्ष रखे थे। इन सभी तथ्यों पर सुनवाई के बाद भी हाईकोर्ट से उन्हें कोई राहत नहीं मिली और उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया।