बलरामपुर। सर्दी का सितम जहां सेहत पर भारी पड़ रहा है, वहीं घने कोहरे ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। 24 घंटे में एक डिग्री तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। कोहरे के कारण वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। बुधवार को अधिकतम तापमान 20 डिग्री और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री रिकाॅर्ड किया गया।
सुबह के समय दृश्यता शून्य रही। दिनभर कोहरा छाया रहा। दोपहर में हल्की धूप निकली, जो बेअसर रही। दिन में कोहरा छंट गया, लकिन शाम ढलते ही फिर से कोहरा छाने लगा। देर रात कोहरे में सड़कों पर कुछ भी दिखाई नहीं दिया। कड़ाके की ठंड से आम जनजीवन बेहाल है। लोगाें के दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। जिला आपदा विशेषज्ञ अरुण सिंह ने बताया कि अगले 24 घंटे तक लगातार पारा गिरने का अनुमान है। इसकी वजह से गलन और ठिठुरन बनी रह सकती है।
फसलों को पहुंच रहा नुकसान
कृषि वैज्ञानिक डॉ. सियाराम कनौजिया ने बताया कि ठंड से रबी फसलों जैसे गेहूं, मटर, सरसों, आलू, टमाटर और सब्जियों को पाला पड़ने से भारी नुकसान होता है, जिससे पौधे झुलस कर काले पड़ जाते हैं और उपज घट जाती है। किसान खेत की मेड़ पर पुआल जलाकर धुआं करने, हल्की सिंचाई, ग्रीन नेट या प्लास्टिक से ढकने, और बोरोन या पोटाश के छिड़काव जैसे उपायों से बचाव कर सकते हैं।
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दिनांक - अधिकतम - न्यूनतम तापमान
16 दिसंबर - 25 डिग्री - 10 डिग्री सेल्सियस
15 दिसंबर - 25 डिग्री - 11 डिग्री सेल्सियस
14 दिसंबर - 25 डिग्री - 11 डिग्री सेल्सियस
13 दिसंबर - 25 डिग्री - 11 डिग्री सेल्सियस
12 दिसंबर - 24 डिग्री - 10 डिग्री सेल्सियस
11 दिसंबर - 25 डिग्री - 11 डिग्री सेल्सियस
10 दिसंबर - 26 डिग्री - 9 डिग्री सेल्सियस
जिला प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता, हाइपोथर्मिया से सतर्कता पर जोर
बलरामपुर। बढ़ती शीतलहर को देखते हुए जिला प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) ज्योति राय ने बताया कि जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से ठंड और उससे उत्पन्न होने वाली समस्याओं से बचाव के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई है। उन्होंने आमजन से मौसम पूर्वानुमान और जारी दिशा-निर्देशों का गंभीरता से पालन करने की अपील की है। एडीएम ने कहा कि शीतलहर के दौरान अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचें और ठंडी हवा के सीधे संपर्क में न आएं। ढीले, हल्के और विंडप्रूफ ऊनी कपड़ों की कई परतें पहनें, क्योंकि टाइट कपड़े रक्त संचार में बाधा डालते हैं। शरीर को सूखा रखें तथा सिर, गर्दन, हाथ और पैरों को पूरी तरह ढककर रखें। दस्ताने, टोपी और मफलर का नियमित उपयोग करें। उन्होंने शरीर का तापमान संतुलित रखने के लिए विटामिन-सी युक्त फल और सब्जियों के सेवन तथा गर्म तरल पदार्थ पीने की सलाह दी। बुजुर्गों, बच्चों और अकेले रहने वाले लोगों की विशेष देखभाल करने पर भी जोर दिया गया। हाथ-पैर की उंगलियों, कान या नाक की नोक सुन्न होना या रंग बदलना शीतलहर का गंभीर संकेत है, ऐसे में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने को कहा गया है। एडीएम ने हाइपोथर्मिया को गंभीर आपात स्थिति बताते हुए कहा कि अत्यधिक कंपकंपी, बोलने में दिक्कत, कमजोरी, सांस लेने में परेशानी इसके प्रमुख लक्षण हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित को तुरंत गर्म स्थान पर ले जाएं, गीले कपड़े बदलें और कंबल से ढकें। बंद कमरे में कोयला या अंगीठी जलाने से बचें, क्योंकि इससे निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड गैस जानलेवा हो सकती है।