बलरामपुर। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा तीन और चार के विद्यार्थियों की रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए नए शैक्षिक सत्र से ‘बांसुरी’ कला पुस्तक लागू की जा रही है। पहली बार बच्चों को कला और संगीत विषय के लिए अलग पुस्तक दी जाएगी, जिससे वे चित्रकला, संगीत, नृत्य और रंगमंच को गतिविधियों के माध्यम से सीख सकेंगे। अब तक स्कूलों में कला की पढ़ाई बिना पुस्तक के होती थी, लेकिन नई व्यवस्था से बच्चों को व्यवस्थित तरीके से कला का शिक्षण मिलेगा।
जिले के 1164 प्राथमिक विद्यालयों में नई पुस्तक में बच्चों को गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर दिया जाएगा। कक्षा तीन की पुस्तक में 20 पाठ शामिल हैं, जिनमें हर अध्याय में क्यूआर कोड दिया गया है। छात्र इसे स्कैन कर अतिरिक्त वीडियो, गीत और गतिविधियों से जुड़ सकेंगे। शिक्षण के दौरान बच्चों से चित्र बनवाने, कागज काटने-चिपकाने, मिट्टी से आकृतियां तैयार करने, कंदील, मुखौटे और छोटे-छोटे मॉडल बनाने जैसी गतिविधियां कराई जाएंगी। स्कूलों में बच्चों की कलाकृतियों का प्रदर्शन भी किया जाएगा, ताकि उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहन मिल सके।
पुस्तक में संगीत और नृत्य को भी विशेष महत्व दिया गया है। बच्चों को विभिन्न भाषाओं के गीत, ताल-लय, ताली और धुनों की समझ दी जाएगी। साथ ही नृत्य और रंगमंच के माध्यम से अभिनय, मंच पर प्रस्तुति और समूह में काम करने का अभ्यास कराया जाएगा। इस प्रक्रिया से बच्चों में आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति कौशल और सामूहिक कार्य करने की क्षमता विकसित होगी।
शैक्षिक सत्र में पढ़ाई के लिए तय हुए घंटे
कला शिक्षण के लिए कुल 100 घंटे का सत्र निर्धारित किया गया है। इसमें दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच के लिए 20-20 घंटे तथा 20 घंटे अनुभवात्मक गतिविधियों के लिए तय किए गए हैं। सप्ताह में चार पीरियड और शनिवार को एक अतिरिक्त कक्षा कला के लिए रखी जाएगी। बच्चों की दक्षता का मूल्यांकन उत्कृष्ट, कुशल, होनहार, विकासशील और आरंभिक श्रेणियों में किया जाएगा। बीएसए शुभम शुक्ल ने बताया कि इस पहल से बच्चों में रचनात्मक सोच, सांस्कृतिक समझ और सीखने की रुचि बढ़ेगी। साथ ही छात्र पढ़ाई के साथ-साथ कला के माध्यम से अपनी प्रतिभा को पहचान सकेंगे और आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुति देना सीखेंगे।