बलरामपुर। नदियों व पहाड़ी नालों के बाढ़ का कहर लोगों पर टूट रहा है। इससे मनरेगा श्रमिक भी अछूते नहीं हैं। मनरेगा काम ठप होने से जिले की 276 ग्राम पंचायतों में श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में मनरेगा श्रमिकों को गांवों में रोजगार मुहैया कराने में बाढ़ व बारिश बाधा बन गई है।
जिले के 793 ग्राम पंचायतों में मनरेगा श्रमिकों को घर बैठे रोजगार के अवसर मुहैया कराने के लिए कच्चे-पक्के काम कराए जाते हैं। जनपद की तीनों तहसीलों में राप्ती व बूढ़ी राप्ती नदियों के साथ 17 पहाड़ी नालों एवं सुआंव नाला में बाढ़ का कहर टूट रहा है। इससे जिले के 276 ग्राम पंचायतों में मनरेगा काम ठप है, जिसके चलते यहां के श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। श्रमिक कल्लू, बड़का, छोटका, मनोरथ व राजू ने बताया कि हरैया सतघरवा ब्लॉक के लालपुर-फगुइया गांव में बारिश के बाद राप्ती नदी में बाढ़ के चलते मनरेगा काम ठप है। ऐसे में मनरेगा श्रमिकों को गांव में रोजगार नहीं मिल पा रहा है। वहीं जिले के सभी नौ ब्लॉकों के 518 ग्राम पंचायतों में मंगलवार को मनरेगा काम हुआ है। इन ग्राम पंचायतों में 21535 मनरेगा श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराया गया।
फैक्ट फाइल
कुल जॉबकार्डधारकों की संख्या - 175355
परिवार से जुड़ मनरेगा श्रमिकों की संख्या - 205470
बाढ़ के कारण आई समस्या
जिले में पिछले चार दिनों तक हुई भारी बारिश के चलते कई गांवों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। बाढ़ के कारण कई ग्राम पंचायतें प्रभावित हैं, जिसके चलते मनरेगा काम संभव नहीं हो पा रहा है। सूखे गांवों में मनरेगा कच्चे व पक्के काम कराए जा रहे हैं।
सतीश कुमार पांडेय, डीसी मनरेगा