बलरामपुर। चार दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी नाले उफान पर हैं। राप्ती नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान की तरफ बढ़ रहा है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 52 सेमी नीचे है। कई गांवों में राप्ती की कटान तेज हो गई है। कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कई रास्तों पर पानी भर जाने के कारण आवागमन प्रभावित है। जिला प्रशासन ने सभी बाढ़ चौकियों को सतर्क कर दिया है। स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
बीते दिनों पहाड़ों तथा जिले में शुरू हुई बारिश रूक-रूक कर लगातार जारी है। खरझार पहाड़ी नाले की बाढ़ के चलते रामगढ़ मैटहवा, विजयीडीह, साहेबनगर, हरिहरनगर, लहेरी, जगरामपुरवा, लोहेपनिया, सहबीनिया, दतरंगवा, भुसैलवा, शांतिनगर, सुगानगर समेत करीब 12 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। राप्ती नदी का जलस्तर लाल निशान की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। नदी खतरे के निशान 104.620 मीटर से मात्र 52 सेमी नीचे है।
पूर्वानुमान के मुताबिक गुरुवार की रात नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो सकती है और नदी खतरे का निशान भी पार कर सकती है। रामगढ़ मैटहवा के लोगों का कहना है कि गांव के निकट महराजगंज तराई बाजार के प्राथमिक स्कूल में बने बाढ़ राहत केंद्र पर कोई कर्मचारी नहीं है। यहां न तो कोई बोर्ड लगा है और न ही बाढ़ पीड़ितों को कोई मदद मिल रही है। हरैया थाना क्षेत्र के भड़सहिया गांव में पहाड़ी नाले की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है।
तेज बहाव के चलते गांव दो हिस्सों में बंट गया है। इससे पूरे गांव के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। ग्रामीण रहमत अली, आलोक तिवारी, मोहम्मद रमजान, बड़का देवी, खेमराज, नीबर व ओम प्रकाश आदि ने प्रदर्शन कर सदर एसडीएम से गांव में राहत व बचाव कार्य शुरू कराने की मांग की है। गौरा चौराहा-तुलसीपुर मार्ग के दतरंगवा डिप पर बाढ़ का पानी भरने से आवागमन बाधित है।
लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली पर 40 रुपये किराया देकर बाढ़ का पानी पार कर रहे हैं। एसडीएम ने इस डिप पर आवागमन के लिए गुरुवार को नाव की व्यवस्था कराई है।
बलरामपुर के डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि लगातार हो रही बारिश के चलते जिले में बाढ़ की संभावना दिख रही है। सभी उपजिलाधिकारियों को क्षेत्र में सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। सभी बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं। हालात की कड़ी निगरानी की जा रही है।