बलरामपुर। भारत-नेपाल दोहरी नागरिकता प्रकरण की जांच अब फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाले नेटवर्क से आगे बढ़कर उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तक पहुंच गई है, जिनके कार्यकाल में सीमावर्ती क्षेत्रों के नेपाली नागरिकों को भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज जारी किए गए थे।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि संबंधित अवधि में किन अधिकारियों के पास दस्तावेज जारी करने का अधिकार था, सत्यापन की प्रक्रिया कैसे अपनाई गई और किन स्तरों पर अनुमोदन किया गया। इसके लिए पुराने सरकारी रिकॉर्ड, विभागीय आदेश और कार्य विभाजन से जुड़े अभिलेखों की जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार पुलिस वर्षवार तैनाती का विवरण जुटा रही है। संबंधित विभागों से उन अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवा संबंधी जानकारी मांगी गई है, जो उस समय निर्वाचन, राजस्व, पूर्ति, पंचायत, शिक्षा और स्थानीय निकायों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर तैनात थे। उनके वर्तमान पदस्थापन की जानकारी भी एकत्र की जा रही है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनसे पूछताछ की जा सके।
मामले की निगरानी पुलिस अधीक्षक विकास कुमार कर रहे हैं। विवेचना टीम से नियमित प्रगति रिपोर्ट ली जा रही है और सामने आने वाले प्रत्येक तथ्य का परीक्षण कराया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल फर्जी दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया और विभागीय जवाबदेही से भी जुड़ा है।
विभागीय जवाबदेही तय करने की तैयारी
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका निर्धारित करना भी है, जिनके कार्यकाल में कथित रूप से संदिग्ध दस्तावेज जारी हुए। सूत्रों के अनुसार विवेचना पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारियों की भूमिका के आधार पर प्रशासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया जाएगा कि किस अधिकारी के पास किस अवधि में कौन-से अधिकार थे और उन अधिकारों के तहत कौन-कौन से दस्तावेज जारी किए गए। पुराने सरकारी आदेशों, सेवा अभिलेखों और जिम्मेदारियों के निर्धारण से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है।
यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी या प्रक्रिया में अनियमितता के प्रमाण मिलते हैं तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
सीमा पार के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
पुलिस भारतीय अभिलेखों के साथ नेपाल के दांग जिले के कोईलाबास क्षेत्र से जुड़ी उपलब्ध सूचनाओं का भी मिलान कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं किसी व्यक्ति की दोनों देशों में अलग-अलग पहचान के साथ सरकारी रिकॉर्ड में मौजूदगी तो नहीं है।
तकनीकी साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
विवेचना के दौरान सामने आए कुछ बयानों में एक प्रभावशाली नेता के कथित मौखिक निर्देशों का उल्लेख होने की बात भी सामने आई है। पुलिस इन बयानों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि कर रही है।
पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने कहा कि पुराने रिकॉर्ड, विभागीय अभिलेख, गवाहों के बयान और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।