बलरामपुर। नाबार्ड की योजनाओं से अब जिले के किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही उनका जीवन भी बेहतर बनाया जाएगा। इसके तहत सामुदायिक खेती, उपज के बाद प्रबंधन परियोजना व प्राथमिक प्रसंस्करण से किसानों की आय बढ़ाने की कार्य योजना को मंजूरी मिली है। मंगलवार को विकास भवन सभागार में हुई नाबार्ड व इंडियन लीड बैंक की संयुक्त बैठक में इस आशय से जुड़ा प्रस्ताव पारित हुआ।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य विकास अधिकारी संजीव कुमार मौर्य ने कहा कि किसानों के खुशहाल होने से ही देश की तरक्की संभव होगी। इसी सोच को साकार बनाने के लिए डीएम के निर्देश पर मार्गदर्शन व समर्थन करने की रणनीति तैयार की गई है। इसके तहत कृषि उत्पादकता बढ़ाने में सामुदायिक खेती के प्रयोग को बढ़ावा देने के साथ ही बीज और पौधों के उत्पादन में निवेश कर किसानों को खेती किसानी में मदद भी पहुंचाई जाएगी।
सीडीओ ने बताया कि कार्ययोजना के तहत उपज के बाद पैकहाउस, सफाई, सुखाने, छंटाई, ग्रेडिंग, मूल्यांकन की व्यवस्था, वेयरहाउस व कोल्ड स्टोरेज जैसे संसाधनों को मुहैया कराने के साथ ई-मार्केटिंग व सप्लाई चेन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए नाबार्ड के सहयोग से चावल, दाल, आटा, तेल, मसाले व चीनी की इकाइयां भी लगाई जाएगी। इससे किसानों की आय बढ़ने से उनका जीवन भी खुशहाल बनेगा।
बैठक में मौजूद जिला प्रबंधक नाबार्ड बृजराज साहनी ने बताया कि वर्ष 2020 में शुरू हुई योजना के तहत उपज के बाद किसानों को सुविधाएं मुहैया कराने का प्रावधान है। योजना में बैंकों व वित्तीय संस्थानों से पूरे देश में किसानों के लिए एक लाख करोड़ जुटाने का प्रावधान किया गया है। इसमें प्रतिवर्ष तीन प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी व दो करोड़ तक ऋण के लिए क्रेडिट गांरटी कवरेज भी शामिल है। योजना में ऋण वितरण छह वर्ष में पूरा होगा।
उप कृषि निदेशक नरेंद्र कुमार व जिला कृषि अधिकारी आरपी राना ने कहा कि कृषि यंत्रों व इंफ्रास्ट्रक्चर पर किसानों को 40 प्रतिशत खरीद सब्सिडी और पीएम किसान योजना के तहत 35 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी शामिल है। ऑपरेशन ग्रीन्स में टमाटर, प्याज व आलू पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। पीएम कुसुम योजना से किसानों को सूर्य की रोशनी से चलने वाले सोलर पंप भी सब्सिडी पर दिए जा रहे हैं।
इंडियन लीड बैंक प्रबंधक अंकित गुप्त ने किसानों को बैंकों से फसली ऋण दिलाने का भरोसा भी दिलाया। बैठक में अजीत सिंह, विजय सिंह के साथ उद्यमी, बैंकर्स, प्रगतिशील किसान व कृषक उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।